NDPS मामला: मजिस्ट्रेट के समक्ष तलाशी के अधिकार का लिखित त्याग न होने पर आरोपी को जमानत
Praveen Mishra
16 July 2026 11:55 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि धारा 50 के तहत आरोपी को प्राप्त अधिकार का केवल मौखिक (Oral) त्याग पर्याप्त नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) की मौजूदगी में तलाशी लेने के अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं करना चाहता, तो उसका यह त्याग लिखित रूप में दर्ज होना चाहिए और उस पर आरोपी के हस्ताक्षर भी होने चाहिए।
जस्टिस श्याम सी. चंदक की एकलपीठ एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं 8(c), 22(b) और 22(c) के तहत गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अभियोजन के अनुसार, पुलिस गश्त के दौरान आरोपी संदिग्ध अवस्था में मिला। उसे धारा 50 के तहत नोटिस देकर उसके अधिकारों की जानकारी दी गई। इसके बाद पंच गवाहों की मौजूदगी में तलाशी ली गई, जिसमें उसके पास से 100 ग्राम मेफेड्रोन (Mephedrone) बरामद होने का दावा किया गया। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट में आरोपी ने दलील दी कि धारा 50 का पालन विधि के अनुसार नहीं किया गया, क्योंकि मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी के सामने तलाशी लेने के अधिकार को छोड़ने (Waiver) का उसका कथित निर्णय केवल मौखिक था और उसे लिखित रूप में दर्ज नहीं किया गया।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि आरोपी को धारा 50 के तहत लिखित नोटिस दिया गया था और उसने मौखिक रूप से कहा था कि मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी के सामने तलाशी की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी का कथित मौखिक त्याग केवल पंचनामा में दर्ज था। न तो यह बात धारा 50 के नोटिस की प्रति पर लिखी गई थी और न ही आरोपी के हस्ताक्षर के साथ अलग से कोई लिखित त्याग पत्र तैयार किया गया था।
अदालत ने कहा कि लिखित त्याग का अभाव प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि तलाशी कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं की गई। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय से जेल में है, अब तक अभियोजन का कोई गवाह भी पेश नहीं हुआ है और अन्य मामलों में आरोपी पहले से जमानत पर है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।


