तेजाब हमले के दो महीने बाद सेप्टीसीमिया से मौत भी हत्या, दोषी की उम्रकैद बरकरार: उत्तराखंड हाईकोर्ट

Update: 2026-07-09 13:07 GMT

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि यदि तेजाब हमले में झुलसी पीड़िता की बाद में सेप्टीसीमिया (संक्रमण फैलने) के कारण मौत होती है और चिकित्सा साक्ष्य यह साबित करते हैं कि संक्रमण तेजाब से लगी चोटों का ही परिणाम था, तो इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध माना जाएगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोषी की हत्या, तेजाब हमला और गाली-गलौज के मामलों में हुई सजा बरकरार रखी।

जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ आपराधिक जेल अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील एडिशनल सेशन कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई, जिसमें आरोपी को अपने भाई शेर सिंह और उसके परिवार पर तेजाब फेंकने का दोषी ठहराया गया था।

मामले के अनुसार, पारिवारिक विवाद के बाद आरोपी ने नशे की हालत में पहले गाली-गलौज की और फिर अपने घर से तेजाब से भरा डिब्बा और मग लाकर शेर सिंह के परिवार पर तेजाब फेंक दिया। इस हमले में परिवार के कई सदस्य, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे, गंभीर रूप से झुलस गए। पीड़िता जया देवी के शरीर का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया। लंबे समय तक इलाज के बाद उनकी 20 नवंबर 2018 को दिल्ली में सेप्टीसीमिया के कारण मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण तेजाब से लगी चोटों में संक्रमण फैलने के कारण हुआ सेप्टीसीमिक शॉक बताया गया।

अपील में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि FIR दर्ज करने में देरी हुई, अभियोजन पक्ष के बयानों में विरोधाभास हैं, जांच एजेंसी ने आरोपी को लगी चोटों का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया और चूंकि पीड़िता की मौत घटना के दो महीने से अधिक समय बाद सेप्टीसीमिया से हुई, इसलिए हत्या की धारा लागू नहीं होती।

हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि घटना में स्वयं शिकायतकर्ता और उसके परिवार के कई सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्वयंसेवकों ने अस्पताल पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। ऐसे में प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी पूरी तरह उचित और स्वाभाविक थी।

अदालत ने यह भी कहा कि घायल प्रत्यक्षदर्शी का बयान विशेष महत्व रखता है और जब तक उसमें गंभीर विरोधाभास न हों, उस पर भरोसा किया जा सकता है। अदालत ने पाया कि सभी घायल गवाहों ने एक समान बताया कि आरोपी ने जानबूझकर तेजाब लाकर परिवार पर फेंका था। बचाव पक्ष की ओर से बताए गए मामूली विरोधाभास पूरे घटनाक्रम को प्रभावित नहीं करते।

मौत के कारण पर हाईकोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता की मृत्यु तेजाब से लगी चोटों में संक्रमण फैलने के कारण हुई और यह उसी हमले का प्रत्यक्ष परिणाम था। इसलिए हत्या का अपराध पूरी तरह सिद्ध होता है।

खंडपीठ ने कहा,

"यह सिद्ध हो चुका है कि जया देवी को तेजाब हमले में गंभीर चोटें आईं, उन्होंने लंबे समय तक उपचार कराया और अंततः उन्हीं चोटों से उत्पन्न सेप्टीसीमिया के कारण उनकी मृत्यु हुई। ऐसे में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध स्पष्ट रूप से बनता है।"

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने आरोपी की आपराधिक जेल अपील खारिज की और IPC की धारा 302, धारा 326ए और धारा 504 के तहत दी गई दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी।

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