वेतन संरक्षण मिलने से पूर्व सेवा को एसीपी में जोड़ने का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

Update: 2026-07-09 13:36 GMT

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व सेवा के आधार पर वेतन संरक्षण दिए जाने मात्र से कर्मचारी को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि उसी सेवा अवधि को सुनिश्चित सेवाकाल प्रगति का लाभ देने के लिए भी जोड़ा जाए। अदालत ने कहा कि वेतन संरक्षण और एसीपी के तहत मिलने वाली वित्तीय उन्नति अलग-अलग क्षेत्र हैं और दोनों अलग-अलग सरकारी आदेशों से संचालित होते हैं।

जस्टिस पंकज पुरोहित एक कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें 6 नवंबर 2013 के सरकारी आदेश तथा उसके आधार पर तीसरे एसीपी का लाभ वापस लेने संबंधी आदेशों को चुनौती दी गई।

याचिकाकर्ता की शुरुआत नगर पालिका परिषद में चपरासी के रूप में नियुक्ति से हुई, जहां बाद में उसकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। इसके बाद नई नियुक्ति के माध्यम से वह राज्य निर्वाचन आयोग में शामिल हुआ। उसका कहना था कि राज्य निर्वाचन आयोग में नियुक्ति के समय उसकी पूर्व सेवा को वेतन संरक्षण के लिए स्वीकार किया गया, लेकिन तीसरे एसीपी के लिए पात्र सेवा की गणना करते समय नगर पालिका परिषद में बिताई गई सेवा अवधि को शामिल नहीं किया गया। हालांकि शुरुआत में उसे तीसरे एसीपी का लाभ दिया गया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता की राज्य निर्वाचन आयोग में नियुक्ति नई नियुक्ति थी। एसीपी योजना से संबंधित सरकारी आदेशों के अनुसार केवल राज्य सरकार के अधीन नियमित सेवा को ही पात्र सेवा माना जा सकता है। स्थानीय निकायों में दी गई सेवा को इसमें नहीं जोड़ा जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान या सरकारी आदेश नहीं दिखा सका, जिसके आधार पर नगर पालिका परिषद में की गई सेवा को राज्य निर्वाचन आयोग में नियुक्ति के बाद एसीपी के लिए जोड़ा जा सके।

अदालत ने कहा कि 8 मार्च 2011, 1 जुलाई 2013 और 6 नवंबर 2013 के सरकारी आदेश एसीपी के तहत वित्तीय उन्नति की पात्रता तय करते हैं और अधिकारियों ने इन्हीं आदेशों के अनुरूप तीसरे एसीपी का लाभ वापस लिया।

वेतन संरक्षण के आधार पर एसीपी का दावा करने की दलील खारिज करते हुए अदालत ने कहा,

"वेतन संरक्षण और एसीपी योजना के तहत वित्तीय उन्नति अलग-अलग क्षेत्र हैं और अलग-अलग प्रावधानों से संचालित होते हैं। केवल इस कारण कि पूर्व सेवा को वेतन निर्धारण के लिए मान्यता दी गई, उससे यह अधिकार पैदा नहीं होता कि उसी सेवा को एसीपी का लाभ देने के लिए भी गिना जाए।"

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी को लागू सरकारी आदेशों के विपरीत एसीपी का लाभ दे दिया गया हो तो उससे उसके पक्ष में कोई स्थायी या अर्जित अधिकार पैदा नहीं हो जाता।

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए तीसरे एसीपी का लाभ वापस लेने के सरकारी आदेश को सही ठहराया।

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