1996 में उत्तराखंड राज्य था ही नहीं, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर ग्राम प्रधान की अयोग्यता बरकरार : उत्तराखंड हाईकोर्ट

Update: 2026-07-08 09:54 GMT

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर निर्वाचित ग्राम प्रधान को अयोग्य ठहराने और पद से हटाने का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि वर्ष 1996 में उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में ही नहीं था। ऐसे में उस वर्ष जारी बताए गए स्थानांतरण प्रमाणपत्र में "उत्तराखंड राज्य" का उल्लेख होना उसके अविश्वसनीय होने का स्पष्ट संकेत है।

जस्टिस मनोज कुमार तिवारी ने ग्राम प्रधान की वह याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके जरिए उन्हें उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 8(1)(क्यू) के तहत अयोग्य घोषित कर पद से हटा दिया गया था।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत की प्रधान चुनी गई थीं। बाद में शिकायत की गई कि उन्होंने नामांकन पत्र में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के एक विद्यालय से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होने का दावा किया, जबकि ऐसा कोई विद्यालय अस्तित्व में नहीं था। जांच रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने उन्हें अयोग्य घोषित किया और बाद में पद से हटाने का आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि स्थानांतरण प्रमाणपत्र में विद्यालय का नाम लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत दर्ज हो गया।

हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि स्थानांतरण प्रमाणपत्र में याचिकाकर्ता का निवास हरिद्वार तहसील के एक गांव का दर्ज है। इससे स्पष्ट होता है कि वह गाजीपुर जिले के उस गांव में नहीं रहती थीं जहां कथित विद्यालय स्थित बताया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का जन्म और पालन-पोषण हरिद्वार जिले में हुआ था। ऐसे में यह समझाने के लिए कोई विश्वसनीय कारण नहीं दिया गया कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के दूरस्थ गाजीपुर जिले के विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा क्यों प्राप्त की।

इसके अलावा अदालत ने स्थानांतरण प्रमाणपत्र की एक और गंभीर खामी की ओर ध्यान दिलाया। प्रमाणपत्र 10 अक्टूबर, 1996 का बताया गया, लेकिन उसमें निवास संबंधी विवरण में "उत्तराखंड राज्य" का उल्लेख था।

अदालत ने कहा,

"अक्टूबर 1996 में उत्तर प्रदेश का पुनर्गठन नहीं हुआ था। इसलिए उस समय जारी बताए गए स्थानांतरण प्रमाणपत्र में निवास संबंधी विवरण के लिए 'उत्तराखंड राज्य' का उल्लेख होना संभव ही नहीं था।"

हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन 9 नवंबर, 2000 को हुआ था। प्रारंभ में इसका नाम "उत्तरांचल" था, जिसे बाद में 1 जनवरी, 2007 से "उत्तराखंड" किया गया। इसलिए वर्ष 1996 के प्रमाणपत्र में "उत्तराखंड राज्य" लिखा होना उसके वास्तविक होने पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है और याचिका खारिज की।

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