उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) को निर्देश दिया कि वह भारत आए तिब्बती मूल के एक व्यक्ति की नागरिकता अर्ज़ी की जांच करें और "अगर सब कुछ सही पाया जाता है", तो इसे छह हफ़्ते के भीतर केंद्र सरकार के सक्षम अधिकारी को भेज दें। कोर्ट ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6(i) के तहत याचिकाकर्ता की अर्ज़ी पर कार्रवाई करने और उसे आगे भेजने के निर्देश की मांग वाली रिट याचिका का निपटारा किया।

जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की सिंगल बेंच ने देहरादून के ज़िला मजिस्ट्रेट के ख़िलाफ़ प्रवासी-याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और कहा कि हालांकि उसने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6(i) के तहत अर्ज़ी दी थी, लेकिन ज़िला मजिस्ट्रेट ने उसे केंद्र सरकार को नहीं भेजा।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने ज़िला मजिस्ट्रेट को निर्देश देने की मांग की कि वह उसकी अर्ज़ी को ज़रूरी रिपोर्ट और ज़रूरी औपचारिकताओं के साथ एक तय समय-सीमा के भीतर संबंधित अधिकारी को भेजें। अहम बात यह है कि मांगी गई अन्य राहतों में नैचुरलाइज़ेशन (प्राकृतिक रूप से नागरिकता) के ज़रिए नागरिकता का प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश भी शामिल था। साथ ही नागरिकता के लिए याचिकाकर्ता की अर्ज़ी से जुड़े दस्तावेज़ भी मांगे गए।

सुनवाई के दौरान, राज्य ने रिट याचिका में बताई गई याचिकाकर्ता की जानकारी का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसकी जन्म तिथि 15 सितंबर, 1992 थी और वह 12 मई, 2013 को ही तिब्बत से भारत आया था।

कोर्ट ने निर्देश दिया,

"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए रिट याचिका का निपटारा इस निर्देश के साथ किया जाता है कि देहरादून के ज़िला मजिस्ट्रेट याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई अर्ज़ी और उसके साथ लगे दस्तावेज़ों की जांच करें। अगर सब कुछ सही पाया जाता है तो उनकी अर्ज़ी को इस आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने की तारीख से छह हफ़्ते के भीतर केंद्र सरकार के सक्षम अधिकारी को भेज दिया जाए।"

Case: Tenzin Thinley Versus District Magistrate Dehradun [WPMS/2414/2026]

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