कानूनी पेशे में सर्वोच्च पद हमेशा मेहनती और धैर्यवान युवा वकीलों के लिए सुरक्षित रहते हैं” — जस्टिस एस.के. साहू ने ओडिशा हाईकोर्ट को दी भावभीनी
ओडिशा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस हरीश टंडन की अध्यक्षता में सोमवार (05 जनवरी) को जस्टिस संगम कुमार साहू के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया गया। हाल ही में उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है।
दोपहर में चीफ जस्टिस के पुराने कोर्ट रूम में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित हुआ, जिसमें जजों के साथ एडवोकेट जनरल पिताम्बर आचार्य, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल (DSGI) पी.के. परही, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (OHCBA) के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा और बार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। चीफ जस्टिस ने जस्टिस साहू की न्याय के प्रति समर्पित कार्यशैली की सराहना की और बताया कि उन्होंने वर्षों से लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई के लिए तत्परता से विशेष पीठ की अध्यक्षता की। DSGI और बार अध्यक्ष ने उनकी कानूनी समझ, उल्लेखनीय निर्णयों और उनकी विशिष्ट गायन प्रतिभा की भी प्रशंसा की।
जस्टिस साहू ने अपनी मातृभाषा ओड़िया में संबोधन दिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दिवंगत पिता और प्रख्यात आपराधिक वकील श्री सरत चंद्र साहू, सिनियर एडवोकेट दिवंगत प्रफुल्ल कुमार धल और एडवोकेट दिवंगत डॉ. मनोरंजन पांडा को दिया, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने वकालत के कौशल सीखे। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के प्रेरणादायक योगदान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने 25 वर्षों के अपने वकालत काल और लगभग 12 वर्षों की न्यायिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि वे अपने कार्यकाल से संतुष्ट हैं, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से आपराधिक क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण याचिकाओं का निस्तारण किया। उन्होंने suo moto PIL [W.P.(C) No. 2140 of 2020] की अध्यक्षता के अपने अनुभव को भी साझा किया, जिसके माध्यम से कट्टरक निवासियों की नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए लगातार निगरानी और सार्थक आदेश पारित किए गए।
पटना हाईकोर्ट के नामित चीफ जस्टिस ने ओडिशा न्यायिक सेवा (OJS) में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बार के युवा वकीलों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस पेशे में परिश्रमी, धैर्यवान और समयनिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए उच्च अवसर सदैव सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने युवा वकीलों से आग्रह किया कि वे आर्थिक लाभ के बजाय पेशे की बारीकियों पर ध्यान केंद्रित करें।
जस्टिस साहू ने रजिस्ट्री और अपने स्टाफ के प्रति निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। भावुक होते हुए उन्होंने सभी से संभावित भूलों के लिए क्षमा याचना भी की। अपने संबोधन का समापन उन्होंने फिल्म मेरा नाम जोकर (1970) के प्रसिद्ध गीत “जीना यहाँ, मरना यहाँ” की पंक्तियाँ गुनगुनाते हुए किया।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस साहू पटना हाईकोर्ट का नेतृत्व करने वाले ओडिशा के केवल तीसरे न्यायाधीश बने हैं। उनसे पूर्व यह दायित्व पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी.बी. पटनायक और दीपक मिश्र ने संभाला था। उनके प्रस्थान के बाद ओडिशा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कार्यरत संख्या घटकर 19 रह गई है, जबकि स्वीकृत पद 33 हैं