तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत सास पर अपनी विधवा बहू या मृत बेटे के बच्चों का भरण-पोषण करने की कानूनी जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। अदालत ने सास के खिलाफ चल रही भरण-पोषण की कार्यवाही रद्द की।

जस्टिस एन. तुकारामजी ने कहा कि धारा 125(1) में उन व्यक्तियों की स्पष्ट श्रेणियां दी गईं, जो भरण-पोषण का दावा कर सकते हैं और जिन पर उन्हें भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी है। इस प्रावधान में सास को अपनी विधवा बहू या मृत बेटे के बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए उत्तरदायी नहीं बनाया गया।

अदालत ने कहा,

“CrPC की धारा 125(1) सास पर अपनी विधवा बहू या उसके मृत बेटे के बच्चों के भरण-पोषण की कोई वैधानिक जिम्मेदारी नहीं डालती।”

मामले में महिला के पति की फरवरी 2022 में मृत्यु हो गई। इसके बाद उसने अपने सास-ससुर के खिलाफ भरण-पोषण की कार्यवाही शुरू की। महिला का आरोप है कि उसे और उसकी दो नाबालिग बेटियों को वैवाहिक घर से निकाल दिया गया तथा बैंक जमा, बीमा लाभ, आभूषण और अन्य संपत्तियां अपने पास रख ली गईं। उसने कहा था कि उसकी अपनी कोई आय नहीं है और इसलिए उसे भरण-पोषण की आवश्यकता है।

कार्यवाही के दौरान ससुर की मृत्यु हो गई और इसके बाद भरण-पोषण का मामला सास के खिलाफ जारी रहा। सास ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

सास की ओर से दलील दी गई कि धारा 125 में उस पर बहू या पोते-पोतियों के भरण-पोषण की कोई जिम्मेदारी नहीं है। दूसरी ओर, राज्य की ओर से कहा गया कि बहू की अपनी कोई आय नहीं है, बच्चों की जरूरतें हैं और सास के पास मृत बेटे की संपत्ति तथा अन्य लाभ होने के आरोप हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125 सामाजिक कल्याणकारी प्रावधान है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को निराश्रयता और भुखमरी से बचाना है। लेकिन इसके उद्देश्य के आधार पर उन लोगों पर भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, जिन्हें कानून ने इसके लिए उत्तरदायी नहीं बनाया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त आर्थिक साधन होना उसे CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण के लिए उत्तरदायी नहीं बनाता। पहले यह स्थापित होना जरूरी है कि कानून के तहत उस व्यक्ति पर संबंधित व्यक्ति के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है।

हाईकोर्ट ने हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इस प्रावधान में कुछ परिस्थितियों में विधवा बहू को अपने ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार दिया गया, लेकिन सास पर ऐसी समान जिम्मेदारी नहीं डाली गई है। ससुर की मृत्यु के बाद यह वैधानिक जिम्मेदारी उसकी पत्नी पर स्थानांतरित नहीं हो जाती।

अदालत ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा से संबंधित कार्यवाही या अन्य कानूनों के तहत उपलब्ध अलग-अलग उपाय धारा 125 के तहत उत्तरदायी व्यक्तियों की श्रेणी का विस्तार नहीं कर सकते।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने सास के खिलाफ CrPC की धारा 125 के तहत चल रही भरण-पोषण की कार्यवाही रद्द की। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति या अन्य परिसंपत्तियों को लेकर बहू के आरोपों के संबंध में कानून में उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लिया जा सकता है।

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: