आधार और वोटर आईडी नागरिकता का प्रमाण नहीं, रिकॉर्ड में विदेशी नागरिकता होने पर वीज़ा नियमों का पालन अनिवार्य: तेलंगाना हाईकोर्ट

Update: 2026-02-02 10:00 GMT

तेलंगाना हाईकोर्ट ने जन्म से भारतीय नागरिक होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने पुलिस और इमिग्रेशन अधिकारियों को उसे लॉन्ग टर्म वीज़ा (LTV) के लिए आवेदन करने के लिए बाध्य करने से रोकने की मांग की थी।

जस्टिस नागेश भीमाबाका ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपने आप में भारतीय नागरिकता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, खासकर तब जब आधिकारिक रिकॉर्ड में विदेशी नागरिकता दर्ज हो और वैधानिक सत्यापन की प्रक्रिया चल रही हो।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय नागरिकता का कोई निर्णायक वैधानिक प्रमाण—जैसे पंजीकरण या नागरिकता प्रमाणपत्र अथवा वैध भारतीय पासपोर्ट—पेश करने में विफल रहा है। न्यायालय ने यह भी माना कि संबंधित प्राधिकरणों की कार्रवाई पाकिस्तानी नागरिकों पर लागू वीज़ा नियमों और सरकारी आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि हैदराबाद के पाकिस्तान शाखा, विशेष शाखा के पुलिस निरीक्षक उसके घर आकर बार-बार उसे LTV के लिए आवेदन करने को मजबूर कर रहे हैं और बिना नोटिस के अभियोजन की धमकी दे रहे हैं, जिससे उसके संविधान के अनुच्छेद 5, 14, 19 और 21 के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उसने यह भी कहा कि वह हैदराबाद में जन्मा है, पिछले तीन दशकों से वहीं रह रहा है, एक भारतीय नागरिक से विवाहित है और अपने परिवार के साथ स्थिर जीवन जी रहा है।

याचिकाकर्ता का मामला उसकी मां की स्थिति से भी जुड़ा था, जो हैदराबाद में जन्मी थीं लेकिन बाद में एक पाकिस्तानी नागरिक से विवाह कर पाकिस्तानी पासपोर्ट प्राप्त किया। मां की नागरिकता स्थिति से संबंधित एक अलग रिट याचिका पहले से ही उच्च न्यायालय में लंबित है।

राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला दिया, जिनके अनुसार याचिकाकर्ता को पाकिस्तानी नागरिक के रूप में दर्ज किया गया है, उसका नाम उसकी मां के पाकिस्तानी पासपोर्ट में शामिल है और उसे न तो भारतीय नागरिकता दी गई है और न ही पहले कोई LTV जारी हुआ है। राज्य ने 04.06.2025 के एक ज्ञापन और 28.04.2025 के भारत सरकार के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसके तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त न करने वाले सभी पाकिस्तानी नागरिकों को LTV के लिए पुनः आवेदन करना अनिवार्य किया गया है। बताया गया कि याचिकाकर्ता और उसकी मां ने जुलाई 2025 में LTV के लिए आवेदन भी कर दिया है।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आधार, वोटर आईडी या पैन जैसे पहचान पत्र नागरिकता प्रदान नहीं करते, विशेष रूप से तब जब विदेशी अधिनियम, 1946, विदेशी आदेश, 1946 और वीज़ा मैनुअल, 2019 के तहत नागरिकता का निर्धारण पासपोर्ट, वीज़ा स्थिति और सक्षम प्राधिकरणों के आदेशों से किया जाता है।

प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन की दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि अधिकारियों की कार्रवाई वैधानिक सत्यापन और अनुपालन प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे दमनात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता। साथ ही, चूंकि याचिकाकर्ता की मां की स्थिति स्वयं विचाराधीन है, ऐसे में याचिकाकर्ता, जिसकी स्थिति “व्युत्पन्न और विवादित” है, प्राधिकरणों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने की मांग नहीं कर सकता।

अंततः, यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता और उसकी मां दोनों ने LTV के लिए आवेदन कर दिया है, उच्च न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे लागू दिशानिर्देशों के अनुसार उनके आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लें।

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