मंदिरों, स्कूलों और अस्पतालों के 100 मीटर दायरे में मांसाहार की बिक्री व सेवन को लेकर नीति बनाए राज्य: तेलंगाना हाइकोर्ट
तेलंगाना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम को निर्देश दिया कि वह मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के 100 मीटर के दायरे में मांसाहारी और मांस उत्पादों की बिक्री व सेवन को विनियमित करने के लिए एक समग्र नीति तैयार करें। हाइकोर्ट ने यह नीति चार सप्ताह के भीतर बनाने का निर्देश दिया।
जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने यह निर्देश एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए दिया। यह याचिका एक रेस्तरां संचालक द्वारा दायर की गई, जिसमें पुलिस और नगर निगम अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न और उसके परिसर में चल रहे नवीनीकरण कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने हैदराबाद के रेड हिल्स क्षेत्र में एक संपत्ति लीज पर लेकर रेस्तरां खोलने की योजना बनाई थी और इसके लिए नवीनीकरण कार्य शुरू किया गया। उसने यह भी कहा कि उसने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम से व्यापार लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से पंजीकरण भी प्राप्त कर लिया था, जो खाद्य सुरक्षा कानून के अनुरूप है।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि चूंकि प्रस्तावित रेस्तरां में मांसाहारी भोजन बेचा जाना था और वह एक हनुमान मंदिर के पास स्थित है, इसलिए पुलिस और अन्य अधिकारी कानून-व्यवस्था और यातायात की समस्या का हवाला देकर उसे बार-बार परेशान कर रहे थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उसके कर्मचारी को जबरन रोका और उसे चुनिंदा रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि उसी इमारत में एक अन्य मांसाहारी रेस्तरां बिना किसी बाधा के संचालित हो रहा है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता की दुकान सड़क के दूसरी ओर स्थित हनुमान मंदिर से 100 मीटर से कम दूरी पर है। सरकार ने सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि समुदाय के स्वास्थ्य और शारीरिक सुविधा के लिए हानिकारक वस्तुओं की बिक्री को विनियमित किया जा सकता है और पुलिस को यह सिफारिश करने का अधिकार है कि ऐसे स्थान पर मांस की दुकान के लिए लाइसेंस न दिया जाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी ऐसा कोई कानूनी प्रावधान या नियम नहीं दिखा सके, जो किसी सार्वजनिक पूजा स्थल के आसपास मांस या मांसाहारी भोजन की बिक्री या सेवन पर रोक लगाता हो। हालांकि, अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि आबकारी नियमों में शराब की बिक्री को लेकर 100 मीटर की सीमा का प्रावधान मौजूद है, लेकिन नगर निगम कानून में मांसाहारी भोजन के लिए ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है।
इसके साथ ही हाइकोर्ट ने धार्मिक भावनाओं, मंदिर परिसर की शांति और स्वच्छता, तथा कानून-व्यवस्था और यातायात से जुड़ी चिंताओं को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि मंदिर परिसर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री या सेवन से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, विशेष रूप से जब संबंधित मंदिर सौ वर्षों से अधिक पुराना हो। साथ ही मंदिर के आसपास शांति और स्वच्छता बनाए रखना भी आवश्यक है।
इन सभी पहलुओं को देखते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया कि वे पूजा स्थलों, स्कूलों और अस्पतालों के 100 मीटर के दायरे में मांस और मांसाहारी भोजन की बिक्री व सेवन को लेकर स्पष्ट और व्यापक दिशा-निर्देश तय करें। अदालत ने कहा कि नीति बनाते समय धार्मिक भावनाओं, शांति, स्वच्छता, कानून-व्यवस्था और यातायात संबंधी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए। इसके अलावा, संबंधित थाना से अनापत्ति प्रमाण पत्र की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया।
नीति तैयार होने तक हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह आदेश की तिथि की स्थिति बनाए रखे और परिसर में कोई परिवर्तन न करे।