बच्चे से मिले बिना उसकी इच्छा दर्ज कर कस्टडी देना अवैध, तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया

Update: 2026-07-14 12:44 GMT

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक फैमिली कोर्ट का अंतरिम कस्टडी आदेश रद्द करते हुए कहा कि किसी बच्चे की इच्छा, पसंद और भावनाओं पर आधारित निष्कर्ष तब तक दर्ज नहीं किए जा सकते, जब तक अदालत ने वास्तव में उससे व्यक्तिगत बातचीत न की हो।

जस्टिस वाकिटी रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि न्यायिक आदेश की वैधता केवल उसके निष्कर्ष पर नहीं, बल्कि उस निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया पर भी निर्भर करती है। यदि अदालत यह दर्ज करती है कि उसने बच्चे से बातचीत की है, तो ऐसी बातचीत वास्तव में हुई होनी चाहिए।

मामला 11 वर्षीय बच्चे की कस्टडी से जुड़ा था। फैमिली कोर्ट ने पिता को अंतरिम कस्टडी देते हुए आदेश में लिखा था कि उसने बच्चे से बातचीत कर उसकी इच्छा जानी है। हालांकि, मां ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं। सुनवाई के दौरान पिता के वकील ने भी स्वीकार किया कि बच्चे से कोई व्यक्तिगत बातचीत नहीं हुई थी और यह टिप्पणी गलती से आदेश में शामिल हो गई।

हाईकोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की गंभीर त्रुटि मानते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और मामले को दो सप्ताह के भीतर नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि फैमिली कोर्ट बच्चे की इच्छा जानना आवश्यक समझे तो वह स्वयं उससे बातचीत कर उसका उचित रिकॉर्ड तैयार करे।

हालांकि, नए आदेश तक बच्चे की अंतरिम कस्टडी पिता के पास ही रहेगी, जबकि मां को प्रत्येक शनिवार मुलाकात का अधिकार और फोन एवं वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की सुविधा जारी रहेगी।

Tags:    

Similar News