स्वास्तिक की जगह ✓ निशान वाले मतपत्र को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

Update: 2026-07-11 13:40 GMT

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मतदाता का इरादा स्पष्ट रूप से व्यक्त हो रहा है, तो केवल इस आधार पर मतपत्र को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उस पर निर्धारित 'स्वास्तिक' चिन्ह के बजाय ✓ (टिक मार्क) लगाया गया है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी नियम या उपनियम में स्पष्ट रूप से यह न कहा गया हो कि केवल स्वास्तिक चिन्ह ही मान्य होगा, तब तक ऐसे मतपत्र को खारिज करना उचित नहीं है।

जस्टिस एन. तुकारामजी ने बोधन बार एसोसिएशन के महासचिव (2026-27) के चुनाव से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित मतपत्र को वैध मानते हुए याचिकाकर्ता को 54 वोट और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को 53 वोट प्राप्त होने का निष्कर्ष निकाला तथा याचिकाकर्ता को विधिवत निर्वाचित घोषित कर दिया।

मामले में चुनाव अधिकारी ने एक मतपत्र इसलिए अमान्य घोषित कर दिया था क्योंकि उस पर स्वास्तिक के बजाय टिक मार्क लगाया गया था। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों को 53-53 वोट मिलने की घोषणा कर चुनाव अधिकारी ने दोनों को छह-छह महीने के लिए महासचिव का पद संभालने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता की मंशा सर्वोपरि होती है और चुनावी प्रक्रिया में केवल तकनीकी औपचारिकताओं को लोकतांत्रिक इच्छा पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। यदि मतपत्र से मतदाता की पसंद स्पष्ट है और उसमें कोई पहचान चिन्ह, कट-फट या अस्पष्टता नहीं है, तो उसे अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव अधिकारी के पास किसी निर्वाचित पद का कार्यकाल दो उम्मीदवारों के बीच बांटने का कोई अधिकार नहीं था। ऐसा निर्णय बार एसोसिएशन के उपनियमों के विपरीत है और चुनाव कराने का अधिकार किसी अधिकारी को उपनियमों में संशोधन या नया प्रावधान बनाने का अधिकार नहीं देता।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने विवादित मतपत्र को वैध घोषित किया, चुनाव अधिकारी का छह-छह महीने का कार्यकाल बांटने वाला आदेश रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता को वर्ष 2026-27 के लिए बोधन बार एसोसिएशन का विधिवत निर्वाचित महासचिव घोषित किया।

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