सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक के मामलों में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम और बेनामी संपत्ति कानून के प्रावधान लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी किया। याचिका में पेपर लीक में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की पूरी संपत्ति का आकलन करने और अवैध संपत्ति जब्त करने की मांग की गई।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने वकील और याचिकाकर्ता स्वयं अश्विनी कुमार उपाध्याय की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी किया।

यह याचिका हाल में सामने आए NEET प्रश्नपत्र लीक की घटना की पृष्ठभूमि में दाखिल की गई, जिससे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को रोकने, उनकी जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी अभियोजन में लगातार कमियां सामने आई हैं।

याचिका में कहा गया कि ऐसी घटनाओं से छात्रों के संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।

याचिकाकर्ता ने केंद्र और राज्य सरकारों को प्रश्नपत्र लीक के मामलों की समयबद्ध जांच और शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक मानक प्रश्नावली और विशेष जांच प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश देने की भी मांग की। हालांकि, मंगलवार को उन्होंने इस मांग पर जोर नहीं दिया। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 में 2026 के संशोधन के बाद समयबद्ध जांच का प्रावधान किया जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में की गई अन्य मांगों पर नोटिस जारी किया। इनमें पेपर लीक में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की पूरी संपत्ति का आकलन करने तथा मामले के अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति कानून और काले धन से संबंधित कानून के प्रावधान लागू करने की मांग शामिल है।

याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को पेपर लीक में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने की भी मांग की गई।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने मांग की कि पेपर लीक के मामलों में दी जाने वाली सजाएं एक साथ चलने के बजाय लगातार चलें, ताकि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए अधिक प्रभावी निवारक व्यवस्था बनाई जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर मामले में आगे सुनवाई होगी।

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