सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद मुस्लिम धर्मगुरु पर हमले के मामले में यूपी पुलिस ने जोड़ीं हेट क्राइम की धाराएं
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2021 में नोएडा के मुस्लिम धर्मगुरु काज़ीम अहमद शेरवानी पर उनकी धार्मिक पहचान के कारण कथित हमले के मामले में घृणा अपराध (हेट क्राइम) की धाराओं के तहत जांच करने पर सहमति जताई है। यह जानकारी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने न्यायालय को दी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ को बताया गया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के अवलोकन से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153B और 295A के आवश्यक तत्व स्पष्ट रूप से बनते हैं, जिन्हें 2023 में दर्ज एफआईआर में शामिल किया जाना चाहिए था। हालांकि, चूंकि चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है, इसलिए जांच अधिकारी (IO) ट्रायल कोर्ट से मूल अभिलेख वापस लेने के लिए आवेदन करेगा, ताकि आगे की जांच करते हुए इन धाराओं को जोड़ा जा सके।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी ने “गंभीर त्रुटि” की, क्योंकि एफआईआर के साधारण अवलोकन से ही उपयुक्त धाराएं लागू की जा सकती थीं। फिर भी न्यायालय ने अधिकारियों को गलती सुधारने के लिए समय दिया। अदालत ने उल्लेख किया कि जांच एजेंसी उचित कानूनी सलाह के तहत अब आवश्यक धाराएं जोड़ते हुए आगे की जांच करना चाहती है और धारा 196 सीआरपीसी (अब बीएनएसएस की धारा 217) के तहत आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त करेगी।
याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष जांच और उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिन्होंने उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की थी। पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य से सवाल किया था कि IPC की धारा 153B और 295A क्यों नहीं लगाई गईं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देशभर में कथित घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध से संबंधित याचिकाओं के एक समूह में आदेश सुरक्षित रख लिया है, लेकिन इस मामले को लंबित रखा है।