नदी प्रदूषण पर 2021 का स्वतः संज्ञान मामला सुप्रीम कोर्ट ने बंद किया, NGT में कार्यवाही जारी रखने को कहा

Update: 2026-02-24 12:38 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रदूषित नदियों के मुद्दे पर जनवरी 2021 में शुरू किए गए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले को बंद कर दिया। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस विषय पर निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की है और कई मंचों पर समानांतर कार्यवाही से निर्देशों की निरंतरता प्रभावित होती है।

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि नदी प्रदूषण से जुड़े मामलों को NGT के समक्ष ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि 2021 में स्वतः संज्ञान लेने के बाद मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

 NGT को बताया उपयुक्त मंच

खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरण संबंधी मामलों में NGT के पास न्यायिक और अर्ध-न्यायिक दोनों प्रकार की शक्तियाँ हैं और उसे निरंतर निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकरण की जिम्मेदारी केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुपालन की निगरानी और समय-समय पर स्थिति रिपोर्ट लेना भी उसका दायित्व है।

मामला यमुना प्रदूषण से शुरू हुआ था

यह स्वतः संज्ञान मामला यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर शुरू हुआ था, जिसे बाद में विभिन्न राज्यों में नदियों में बिना उपचारित सीवेज छोड़े जाने के मुद्दे तक विस्तारित किया गया। अदालत ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

समानांतर कार्यवाही से समस्या

अदालत ने कहा कि एक ही विषय पर कई मंचों पर चल रही कार्यवाहियाँ निर्देशों की एकरूपता और प्रभावशीलता को प्रभावित करती हैं। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि देश की सभी प्रदूषित नदियों पर एक साथ निगरानी करना सुप्रीम कोर्ट के लिए व्यावहारिक नहीं है।

अद्यतन जानकारी के अभाव में समीक्षा संभव नहीं

खंडपीठ ने कहा कि इतने वर्षों में परिस्थितियों में क्या सुधार हुआ, इसका आकलन करने के लिए अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि बेहतर होता कि शुरुआत में ही NGT को अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान कार्यवाही बंद करते हुए कहा कि नदी प्रदूषण से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए NGT ही उचित मंच है और आवश्यकता पड़ने पर वहां कार्यवाही पुनः शुरू की जा सकती है।

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