अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय व्यवस्था लागू करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Update: 2026-07-17 10:30 GMT

राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर से लोकसभा सांसद राजकुमार रोत ने अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में प्रभावी शहरी स्थानीय स्वशासन (Urban Local Self-Governance) लागू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 243ZC और पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था का प्रावधान है, लेकिन तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस संबंध में कोई कानून नहीं बनाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि 74वें संविधान संशोधन (1992) के जरिए संविधान में भाग IX-A जोड़कर नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया था। हालांकि, अनुच्छेद 243ZC के तहत अनुसूचित क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया और यह अपेक्षा की गई कि संसद इनके लिए अलग कानून बनाएगी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि 73वें संविधान संशोधन के बाद ग्रामीण अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था लागू करने के लिए संसद ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) बनाया था। लेकिन नगर निकायों के लिए आज तक ऐसा कोई कानून नहीं लाया गया।

याचिका में कहा गया है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण, आबादी में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के कारण अनुसूचित क्षेत्रों की कई बस्तियां अब शहरी स्वरूप ले चुकी हैं।

इसके बावजूद वे नगर निकायों की व्यवस्था से बाहर हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों को भूमि उपयोग, नगर नियोजन, स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, बुनियादी ढांचे और स्थानीय वित्त जैसे मामलों में प्रभावी भागीदारी का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

याचिका के अनुसार, सांसद ने 6 मई 2026 को इस संबंध में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भी प्रतिनिधित्व दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि वह संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग नहीं कर रहे हैं। बल्कि, विशाखा बनाम राजस्थान और अनीश/अनूप बरनवाल जैसे फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि जहां कानून में खालीपन (Legislative Vacuum) हो, वहां अदालत अंतरिम दिशानिर्देश जारी कर सकती है।

याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह जनजातीय कार्य मंत्रालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, संवैधानिक विशेषज्ञों, जनजातीय प्रशासन के विशेषज्ञों, शहरी नियोजन विशेषज्ञों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों को शामिल कर एक विशेषज्ञ समिति गठित करे।

यह समिति अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय प्रशासन के लिए मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक विधायी, प्रशासनिक और संस्थागत सुधारों की सिफारिश करे।

इसके अलावा, केंद्र सरकार को भाग IX-A, पांचवीं अनुसूची और अन्य संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उचित ढांचा तैयार करने पर विचार करने का भी निर्देश देने की मांग की गई है।


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