सुप्रीम कोर्ट ने Vijay Madanlal Choudhary फैसले को चुनौती देने वाली review petitions की सुनवाई कर रही बेंच का पुनर्गठन किया है। अब CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना इन याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे।

इससे पहले बेंच में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि यदि पिछली बेंच मामले की सुनवाई जारी रखती है तो तीन बेंचों का पुनर्गठन करना पड़ेगा। उन्होंने पक्षकारों से इस संबंध में उनकी राय मांगी।

Review petitioners की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और ED की ओर से Solicitor General तुषार मेहता ने बेंच के पुनर्गठन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। SG ने कहा कि पिछली बेंच के समक्ष मामले में कोई substantial hearing नहीं हुई है।

क्या है मामला?

27 जुलाई 2022 को सुप्रीम कोर्ट की तत्कालीन बेंच—जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार—ने Vijay Madanlal Choudhary मामले में PMLA की कई महत्वपूर्ण धाराओं को बरकरार रखा था।

फैसले में ED की गिरफ्तारी, संपत्ति कुर्की, search और seizure से संबंधित शक्तियों के साथ PMLA की धारा 24 के तहत reverse burden of proof और धारा 45 में bail की twin conditions को बरकरार रखा गया था।

इस फैसले के खिलाफ 8 review petitions दाखिल की गईं। अगस्त 2022 में नोटिस जारी करते हुए तत्कालीन CJI एनवी रमना की अगुवाई वाली बेंच ने मौखिक रूप से कहा था कि फैसले के कम-से-कम दो पहलुओं पर दोबारा विचार की जरूरत हो सकती है—आरोपी को ECIR की प्रति उपलब्ध कराने का मुद्दा और presumption of innocence के reversal से जुड़ा पहलू।

बाद में review petitions की open court hearing की अनुमति दी गई। हालांकि, कई मौकों पर सुनवाई टलती रही।

पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने कहा था कि review hearing को इन्हीं दो मुद्दों तक सीमित रखा जाना चाहिए। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि 2022 के आदेश में ऐसा कोई सीमांकन दर्ज नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट पहले review petitions की maintainability पर पक्षकारों को सुनेगा और इसके बाद मामले के अन्य पहलुओं पर आगे बढ़ेगा।

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