वकीलों को कोर्ट परिसर में सभी के साथ शालीन व्यवहार करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वकीलों का कोर्ट परिसर में शालीन और मर्यादित व्यवहार करना जरूरी है। वकील का कर्तव्य केवल अपने मुवक्किल के साथ ही नहीं, बल्कि विपक्षी वकील और उसके मुवक्किल के प्रति भी सम्मानजनक व्यवहार करना है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि कोर्ट परिसर में वकील का अनुचित व्यवहार Advocates Act, 1961 के तहत पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) माना जा सकता है। ऐसे मामले में संबंधित State Bar Council या Bar Council of India संज्ञान ले सकती है।
यह मामला वर्ष 2005 की एक घटना से जुड़ा था। एक वकील पर आरोप था कि उसने कोर्ट परिसर में विपक्षी पक्ष के मुवक्किल के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया, उसकी कॉलर पकड़ी, मारपीट की, गाली दी और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना को लेकर पेशेवर कदाचार की शिकायत के साथ पुलिस शिकायत भी दर्ज की गई थी।
मामला 2012 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था और वकील के निलंबन पर अंतरिम रोक लगी हुई थी। Bar Council of India ने वकील का लाइसेंस एक साल के लिए निलंबित किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि घटना को करीब 21 साल बीत चुके हैं, इसलिए मामले को दोबारा BCI के पास भेजने के बजाय कोर्ट ने स्वयं मामले का निपटारा करना उचित समझा। पीठ ने वकील को चेतावनी देते हुए अपील का निपटारा कर दिया और BCI के आदेश को इसी सीमा तक संशोधित किया।