सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: FIR रद्द करते समय अपराध और आरोपों का उल्लेख करें हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी हाईकोर्टों को सलाह दी कि FIR रद्द करने से जुड़े मामलों में आदेश पारित करते समय FIR की सामग्री और उसमें लगाए गए आरोपों की प्रकृति का संक्षिप्त उल्लेख अवश्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे यह समझने में सुविधा होगी कि हाईकोर्ट ने मामले पर उचित ढंग से विचार किया है या नहीं।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने कहा कि FIR को शब्दशः आदेश में शामिल करना आवश्यक नहीं है लेकिन इतना जरूर होना चाहिए कि आरोपों की प्रकृति और मामले का सार स्पष्ट हो सके। अदालत ने कहा कि जब कोई मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचता है तो हाईकोर्ट के आदेश से यह पता चलना चाहिए कि उसने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों और आरोपों पर समुचित विचार किया था।
यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में दर्ज FIR केवल इस आधार पर रद्द किया कि FIR दर्ज कराने में 24 दिन की देरी हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि FIR दर्ज करने में देरी एक ऐसा पहलू है, जिस पर मुकदमे के दौरान विचार किया जा सकता है, लेकिन केवल देरी के आधार पर FIR रद्द नहीं की जा सकती।
खंडपीठ ने कहा कि FIR रद्द करने के किसी भी आवेदन पर विचार करते समय हाईकोर्ट का दायित्व है कि वह अपराध की प्रकृति, आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करे। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या FIR से किसी संज्ञेय अपराध के घटित होने का प्रथम दृष्टया खुलासा होता है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि संबंधित मामले में हाईकोर्ट ने आरोपों की प्रकृति पर कोई चर्चा नहीं की थी और न ही यह बताया था कि FIR में क्या आरोप लगाए गए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विस्तृत न्यायिक परीक्षण आवश्यक होता है।
इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया और FIR को बहाल करते हुए पुलिस को कानून के अनुसार आगे की जांच और कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी।
यह फैसला FIR रद्द करने से जुड़े मामलों में हाईकोर्टों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे आदेशों में अधिक पारदर्शिता और न्यायिक विवेक का स्पष्ट प्रदर्शन सुनिश्चित हो सकेगा।