मदरसों, वैदिक पाठशालाओं और धार्मिक शिक्षा संस्थानों को RTE Act से मिली छूट को चुनौती पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 'बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act) की धारा 1(4) और (5) की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने पर सहमति जताई है। इन धाराओं के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को इस कानून के दायरे से छूट दी गई।
धारा 1(4) के अनुसार, RTE Act का लागू होना संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यकों को मिले अधिकारों के अधीन होगा। धारा 1(5) के अनुसार, यह एक्ट मदरसों, वैदिक पाठशालाओं और मुख्य रूप से धार्मिक शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होता है।
यह जनहित याचिका महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक समिति के अध्यक्ष प्यारे ज़िया खान ने दायर की। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि RTE एक्ट अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होता, इसलिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) भी उन पर लागू नहीं होती।
याचिकाकर्ता ने मांग की कि TET को RTE के तहत आने वाले सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य और लागू किया जाना चाहिए, चाहे वे अल्पसंख्यक स्कूल हों, मदरसे हों, वैदिक पाठशालाएं हों या धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थान हों।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने निर्देश दिया कि इस मामले को 'अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य' मामले के साथ जोड़ा जाए और उचित आदेश के लिए इसे चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष पेश किया जाए।
'अंजुमन' मामले में बेंच ने 'प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ' मामले के फैसले की सही होने पर संदेह जताया था, जिसमें कहा गया था कि RTE एक्ट अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होगा।
Case Details: PYARE ZIA KHAN v UNION OF INDIA & ORS|Writ Petition (Civil) No.924/2026