जयपुर में कमर्शियल एरिया से नहीं हटे कोचिंग सेंटर, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता; JDA से मांगी रिपोर्ट

Update: 2026-08-06 10:50 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर में कमर्शियल क्षेत्रों में संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों पर चिंता जताते हुए कहा कि उनके लिए अलग से बहुमंजिला इमारतें बनाए जाने के बावजूद उन्हें अब तक वहां स्थानांतरित नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन इमारतों का आवंटन किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को किया गया है, तो वह इस मामले में अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि कोचिंग संस्थानों के स्थानांतरण और इस समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए विशेष भवन तैयार कर दिए हैं, लेकिन कोचिंग सेंटर अब भी कमर्शियल इलाकों से संचालित हो रहे हैं। वहीं, जिन इमारतों का निर्माण उनके पुनर्वास के लिए किया गया था, उनका आवंटन अन्य संस्थाओं को किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर मास्टर प्लान के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को भी "चौंकाने वाला" और "गंभीर" बताया। कोर्ट ने कहा कि जिन जमीनों को नियोजन के तहत JDA को सौंपा गया, उनका न तो निर्धारित उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया और न ही उन पर अतिक्रमण रोका गया।

इसके अलावा, कोर्ट ने JDA की कार्रवाई के खिलाफ लंबित अपीलों के वर्षों तक लंबित रहने पर भी नाराजगी जताई और अपीलीय प्राधिकरण को निर्देश दिया कि सभी मामलों का दो सप्ताह के भीतर निस्तारण किया जाए। साथ ही, समयसीमा के पालन के लिए प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया।

यह मामला देशभर में अवैध निर्माण, मास्टर प्लान के उल्लंघन और अनधिकृत भूमि उपयोग से जुड़े मामलों की निगरानी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है। मार्च 2026 में कोर्ट ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया था।

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