मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालत की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो क्लिप साझा करने और अपलोड करने पर लगाई गई अंतरिम रोक का मतलब यह नहीं है कि मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध केवल अदालत की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो क्लिप के उपयोग तक सीमित है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ ने कहा कि 24 जुलाई के अंतरिम आदेश को समाचार संस्थानों की रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। समाचार संस्थान कानूनी घटनाक्रम और न्यायिक फैसलों की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन रिपोर्टिंग में अदालत की कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को निकालना, संपादित करना, साझा करना, अपलोड करना या उसका मुद्रीकरण करना प्रतिबंधित रहेगा।
मामले में आरटीआई कार्यकर्ताओं की हस्तक्षेप याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 तय की है। यह मामला पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की जनहित याचिका पर आधारित है, जिसमें अदालत की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के उपयोग और प्रसार को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है।