सुप्रीम कोर्ट ने Centre for Public Interest Litigation (CPIL) की 2018 से लंबित उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है, जिसमें केंद्र सरकार को Collegium द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए की गई सिफारिशों पर एक तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

एडवोकेट प्रशांत भूषण ने मंगलवार को मामले की तत्काल लिस्टिंग के लिए चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष इसका उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 के बाद से यह मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ है, जब मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एस.के. कौल सेवानिवृत्त हुए थे।

भूषण ने कहा कि जजों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया से जुड़ी कुछ समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं और मामले को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

इस पर चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समस्याएं “more or less likely to be solved” हैं और मामले को सूचीबद्ध किया जा सकता है।

पहले भी Centre की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी

CPIL की याचिका पर पहले जस्टिस एस.के. कौल की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही थी। इसी के साथ Advocates Association of Bengaluru की एक contempt petition भी जुड़ी थी।

2022-23 के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Collegium की सिफारिशों पर केंद्र द्वारा लंबे समय तक कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर कई बार चिंता जताई थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कुछ सिफारिशों पर selective appointments किए जा रहे हैं।

यह मामला आखिरी बार 5 दिसंबर 2023 को सूचीबद्ध हुआ था, लेकिन बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के इसे सूची से हटा दिया गया। उस समय जस्टिस एस.के. कौल ने भी इस पर आश्चर्य जताया था।

Collegium की सिफारिशों पर देरी का मुद्दा फिर सामने

पिछले साल मामले की listing के लिए उल्लेख किए जाने पर तत्कालीन चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा था कि Collegium इस मुद्दे को सरकार के साथ administrative level पर उठा रहा है।

मामला उस समय भी चर्चा में आया था जब केंद्र द्वारा Collegium की सिफारिशों पर लंबे समय तक निर्णय नहीं लेने के बाद दो वकीलों ने जज बनने की अपनी सहमति वापस ले ली थी।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा CPIL की याचिका को दोबारा सूचीबद्ध करने पर सहमति जताए जाने से Collegium की सिफारिशों पर केंद्र की कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने की मांग एक बार फिर अदालत के सामने आएगी।

इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए क्लिक करें 

Tags: