“क्या भ्रष्टाचार चल रहा है वहां?”: NSEL केस की सुनवाई में MPID कोर्ट्स पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
NSEL घोटाले से जुड़ी हरियाणा की एक ज़मीन की नीलामी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने MPID कोर्ट्स के कामकाज पर कड़ी नाराज़गी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ MPID कोर्ट्स का रवैया बेहद “दुस्साहसी” रहा है और वहां हो रहे भ्रष्टाचार पर हाईकोर्ट को ध्यान देना चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच क्विकर रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हरियाणा की 35 एकड़ ज़मीन की नीलामी रद्द करते हुए वैल्यूअर को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया गया था।
मामले में ज़मीन की शुरुआती कीमत ₹74 करोड़ से अधिक आंकी गई थी, लेकिन बाद में इसे कृषि भूमि मानकर केवल ₹10 करोड़ के आसपास बेच दिया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए। CJI ने कहा:
“₹100 करोड़ की संपत्ति को संदिग्ध प्रक्रिया से ₹10 करोड़ में बेच दिया गया… ऐसे में आप यहां किस आधार पर आए हैं?”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ज़मीन रिहायशी क्षेत्र में थी, फिर भी उसे कृषि भूमि मान लिया गया और नई वैल्यूएशन से पहले कोई साइट निरीक्षण भी नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद MPID कोर्ट ने “बैकडेट” में बिक्री विलेख जारी किए थे। उन्होंने कहा, “क्या भ्रष्टाचार चल रहा है वहां?”
जब महाराष्ट्र सरकार ने सक्षम प्राधिकारी को हटाने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताई, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतना बड़ा फ्रॉड सामने आया है और हाईकोर्ट तो FIR दर्ज करने का निर्देश भी दे सकता था।
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद क्विकर रियल्टी ने अपनी SLP वापस ले ली ताकि वह हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर सके।