7 साल तक की सजा वाले गैर-जमानती अपराधों में धारा 480(3) BNSS की शर्तें लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-04-27 09:35 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे गैर-जमानती अपराध जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष तक है, उनमें जमानत देते समय Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 480(3) के तहत निर्धारित शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को Madhya Pradesh Excise Act (मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम) के तहत अवैध शराब रखने के आरोप में जमानत दी गई थी। इस अपराध में अधिकतम सजा तीन वर्ष निर्धारित है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर पीठ ने आरोपी की जमानत इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उसने धारा 480(3) के तहत लगाई गई शर्तों का उल्लंघन किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अपराध में सजा सात वर्ष से कम है, तो धारा 480(3) की शर्तें प्रारंभ से ही लागू नहीं होतीं। इसलिए इन शर्तों के उल्लंघन के आधार पर जमानत रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।

अदालत ने कहा कि धारा 480(3) के तहत शर्तें केवल उन्हीं गैर-जमानती अपराधों में लागू होती हैं, जिनमें सजा सात वर्ष या उससे अधिक हो। चूंकि इस मामले में अधिकतम सजा तीन वर्ष है, इसलिए ऐसी शर्तें लगाना ही विधि के अनुरूप नहीं था।

मामले की पृष्ठभूमि में, आरोपी को पहले हाईकोर्ट ने जमानत देते समय उक्त शर्तों के साथ राहत दी थी। बाद में राज्य ने यह आरोप लगाते हुए जमानत रद्द करने का आवेदन किया कि आरोपी ने दोबारा समान अपराध किया है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि जब शर्तें ही लागू नहीं थीं, तो उनके उल्लंघन का प्रश्न ही नहीं उठता। इसी आधार पर न्यायालय ने उच्च न्यायालय का आदेश निरस्त करते हुए आरोपी की जमानत बहाल कर दी।

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