आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, पसंद के प्रशिक्षित Caregiver की 24 घंटे सेवा लेने की अनुमति

Update: 2026-08-06 10:39 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को बड़ी राहत देते हुए अपनी पसंद के प्रशिक्षित Caregiver की 24 घंटे सेवा लेने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी सजा निलंबित (Suspension of Sentence) करने की मांग पर फिलहाल कोई फैसला नहीं दिया और मामले को लंबित रखा।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ ने AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह आदेश पारित किया। रिपोर्ट में कहा गया था कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, लेकिन उनकी बीमारियों को देखते हुए उन्हें 24 घंटे प्रशिक्षित Caregiver की सहायता की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वह Coronary Artery Disease, Thalassemia और Osteoporosis जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आसाराम ने हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की मेडिकल पैरोल हासिल की, लेकिन इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका की जानकारी छिपाई। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी हाईकोर्ट में दायर पैरोल याचिका का खुलासा नहीं किया गया। इस पर जस्टिस सुंदरेश ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि ऐसा करना "सही नहीं है।"

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति और गंभीर होती है, तो वे दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।

गौरतलब है कि जोधपुर की विशेष POCSO अदालत ने 2018 में आसाराम को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में शेष प्राकृतिक जीवन (Life Imprisonment for the remainder of natural life) तक की सजा सुनाई थी। मई 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने IPC के अधिकांश आरोपों में उनकी सजा बरकरार रखी थी, जबकि POCSO Act के तहत दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था।

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