सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई कानूनी अथॉरिटी या राज्य की संस्था संविधान के आर्टिकल 131 के तहत अपने ओरिजिनल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) का इस्तेमाल नहीं कर सकती। कोर्ट ने दोहराया कि यह प्रावधान भारत संघ और एक या अधिक राज्यों के बीच विवादों तक ही सीमित है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए यह बात कही। हाईकोर्ट ने लखनऊ में ज़मीन के कब्ज़े से जुड़े विवाद पर लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) की लंबे समय से लंबित रिट याचिका खारिज की थी।

यह मामला LDA द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में भारत संघ, GOC-in-C (सेंट्रल कमांड) और स्टेशन कमांडर (सब-एरिया, छावनी, लखनऊ) के खिलाफ दायर रिट याचिका से जुड़ा था। विवाद उस ज़मीन को लेकर था, जिस पर LDA ने एक कॉलोनी विकसित की थी और लाभार्थियों को प्लॉट और फ्लैट आवंटित किए। LDA के अनुसार, केंद्र सरकार और रक्षा प्रतिष्ठानों के अधिकारी आवंटियों के भौतिक कब्ज़े में दखल दे रहे थे और दावा कर रहे थे कि ज़मीन उनकी है।

संबंधित अधिकारियों के बीच विवाद सुलझाने की कोशिशें नाकाम रहने के बाद हाईकोर्ट ने 19 सितंबर, 2023 के आदेश में LDA की रिट याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि विवाद का फैसला रिट कार्यवाही में नहीं किया जा सकता और पक्षों को आर्टिकल 131 के तहत कार्यवाही शुरू करने की छूट दी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस नज़रिए को कानूनी रूप से गलत पाया।

LDA को आर्टिकल 131 के लिए 'राज्य' नहीं माना जा सकता

कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने विवाद की प्रकृति को मूल रूप से गलत समझा था। रिट याचिका LDA ने दायर की थी, न कि उत्तर प्रदेश राज्य ने।

बेंच ने ज़ोर दिया कि LDA एक कानूनी निकाय (Statutory Body) है, जिसका गठन उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 के तहत किया गया। हालांकि, यह कॉर्पोरेट निकाय है और संविधान के आर्टिकल 12 के तहत "राज्य" की परिभाषा में आ सकता है, लेकिन इससे यह आर्टिकल 131 के उद्देश्यों के लिए "राज्य" नहीं बन जाता।

आर्टिकल 131 सुप्रीम कोर्ट को भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच विवादों में ओरिजिनल अधिकार क्षेत्र देता है। कोर्ट ने साफ़ किया कि आर्टिकल 131 में "States" (राज्य) शब्द का मतलब संविधान की पहली अनुसूची में बताए गए यूनियन के घटक राज्यों से है, न कि आर्टिकल 12 के तहत "State" की व्यापक परिभाषा में आने वाली हर अथॉरिटी या संस्था से।

इसलिए कोर्ट ने माना कि LDA जैसी अथॉरिटी आर्टिकल 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट के ओरिजिनल ज्यूरिस्डिक्शन (मूल अधिकार क्षेत्र) का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

आगे कहा गया,

"आर्टिकल 131 में 'States' शब्द का मतलब संविधान की पहली अनुसूची में शामिल यूनियन के घटक राज्यों से है, जो आर्टिकल 12 में परिभाषित 'State' से अलग है। भले ही अपील करने वाला पक्ष आर्टिकल 12 के तहत राज्य की एक संस्था के तौर पर आता हो, लेकिन आर्टिकल 131 के मकसद से वह 'State' नहीं है। आर्टिकल 131 के क्लॉज़ (a), (b) और (c) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल सिर्फ़ पहली अनुसूची में बताए गए राज्य ही कर सकते हैं, न कि आर्टिकल 12 के दायरे में आने वाली कोई अथॉरिटी या संस्था। इसलिए आर्टिकल 131 की शर्तों के आधार पर, अपील करने वाले पक्ष के लिए इस कोर्ट के ओरिजिनल ज्यूरिस्डिक्शन में आना मुमकिन नहीं है।"

हाईकोर्ट के नज़रिए को "बड़ी गलती" बताते हुए बेंच ने कहा कि रिट याचिका लगभग ढाई दशकों से लंबित थी और इस आधार पर उसे खारिज करने की आलोचना की कि विवाद यूनियन और राज्य के बीच था।

रिट याचिका को कानून के मुताबिक नए फ़ैसले के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया। याचिका दायर होने के बाद से काफी समय बीत जाने को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मामले पर जल्द फ़ैसला करने का अनुरोध किया।

Case : Lucknow Development Authority v. Union of India & Ors., Civil Appeal No. 11201 of 2026

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