Sedition | आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो कोर्ट IPC की धारा 124A से जुड़े ट्रायल/अपील आगे बढ़ा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ़ किया कि अगर आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो कोर्ट राजद्रोह (IPC की धारा 124A) के अपराध से जुड़े ट्रायल या अपील आगे बढ़ा सकते हैं।
कोर्ट ने साफ़ किया कि मई 2022 में SG Vombatkere केस में दिया गया उसका आदेश, जिसमें पुराने राजद्रोह कानून को रोकते हुए IPC की धारा 124A से जुड़े सभी ट्रायल और कार्यवाही पर भी रोक लगा दी गई।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने ऐसे आरोपी के मामले में यह आदेश दिया, जो 17 साल से जेल में है और जिसकी आपराधिक अपील मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेंडिंग है।
संक्षेप में मामला
याचिकाकर्ता को सेशंस कोर्ट ने 27.02.2017 के फ़ैसले के तहत IPC की धारा 122, 124A, 153A के साथ-साथ UAPA की धारा 10B(ii) और 13(1)(ab), 13(2) और Arms Act की धारा 25(1B)(a) के तहत दोषी ठहराया था। उसे, अपने सह-आरोपी के साथ, उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी।
उसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक आपराधिक अपील दायर की, जो डिवीज़न बेंच के सामने पेंडिंग है। हाईकोर्ट ने अपील को पेंडिंग रखा, ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को ध्यान में रखते हुए, जिसमें राजद्रोह के अपराध से जुड़ी कार्यवाही को रोकने के लिए कहा गया।
इस पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश पारित किया -
"याचिकाकर्ता की शिकायत यह है कि उसे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि उसकी आपराधिक अपील की सुनवाई पूरी तरह से की जाए, जिसमें धारा 124A के तहत लगाए गए आरोप भी शामिल हों। ऐसी स्थिति में हम अपने अंतरिम आदेश दिनांक 11.05.2022 के पैरा 8(d) को स्पष्ट करते हैं... जिसका आशय यह है कि जहां भी अभियुक्त को मुकदमे, अपील, या किसी अन्य कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर कोई आपत्ति नहीं है - जिसमें उसके विरुद्ध धारा 124A IPC के तहत भी आरोप पत्र दाखिल किया गया हो - वहां न्यायालयों के लिए ऐसे मामलों का निर्णय गुण-दोष के आधार पर और कानून के अनुसार करने में कोई बाधा नहीं होगी।"
न्यायालय ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह याचिकाकर्ता की अपील को, उससे जुड़ी अन्य अपीलों के साथ सुनवाई के लिए ले और उसका निर्णय गुण-दोष के आधार पर करे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष के संबंध में कोई भी राय व्यक्त नहीं की।
Case Title: KAMRAN Versus STATE OF MADHYA PRADESH, Diary No. 16320-2026