S. 38 BNSS | आरोपी का वकील पुलिस पूछताछ के दौरान हर समय मौजूद नहीं रह सकता: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-07-27 15:40 GMT

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 38 के दायरे को स्पष्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (27 जुलाई) को कहा कि यह प्रावधान गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार तो देता है, लेकिन पूछताछ के पूरे समय वकील की लगातार शारीरिक मौजूदगी की बात नहीं करता है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,

"इस प्रावधान को पढ़ने से साफ पता चलता है कि इसके तहत मिलने वाला अधिकार पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार है। इसका मतलब किसी भी तरह से यह नहीं है कि हर पूछताछ सत्र के दौरान वकील लगातार शारीरिक रूप से मौजूद रहे, चाहे वह कितनी भी दूरी (देखने या सुनने की दूरी) पर क्यों न हो।"

यह बेंच आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ थी, जिसमें आरोपी की पुलिस कस्टडी के दौरान जेल में दो वकीलों को नामित करने और उनकी मौजूदगी की अनिवार्य शर्त रखी गई। साथ ही 'आरोपी से पूछताछ के दौरान किसी भी समय' एक वकील को मौजूद रहने की अनुमति दी गई।

राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में इस शर्त को चुनौती देते हुए कहा कि यह बहुत ज़्यादा है और इससे जांच में बाधा आती है।

राज्य की दलील में दम पाते हुए जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लिखे गए फैसले में राज्य की इस आशंका को सही माना गया कि लगाई गई शर्तों से आरोपी की कस्टडी में जांच में बाधा आएगी। इसके अलावा, कोर्ट ने पाया कि आरोपी से पूछताछ के दौरान वकील की मौजूदगी की अनुमति देने वाली शर्त BNSS की धारा 38 के दायरे से बाहर है।

कोर्ट ने कहा,

"हालांकि, यह निर्देश कि ऐसी मौजूदगी 'पूछताछ के दौरान किसी भी समय' होनी चाहिए, अगर इसे लगातार मौजूदगी के बिना शर्त अधिकार के तौर पर समझा जाए तो यह BNSS की धारा 38 के दायरे से बाहर चला जाएगा..."

नतीजतन, वकील की मौजूदगी की अनुमति देने वाली शर्त को इस बदलाव के साथ बरकरार रखा गया कि "ऐसे वकील को केवल पूछताछ वाली जगह पर ही मौजूद रहने की अनुमति होगी, जहां से वह आरोपी को देख सके।"

Cause Title: THE STATE OF ANDHRA PRADESH VERSUS SUDA SURESH VEERA VENKATA NAGA RAJU

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