विरोध-प्रदर्शन के दौरान पाबंदियों के बीच वकीलों, पत्रकारों और दूसरे प्रोफेशनल्स को अपना काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने CEC विरोध-प्रदर्शन मामले की सुनवाई के दौरान साफ तौर पर कहा कि वकीलों, पत्रकारों और दूसरे प्रोफेशनल्स को उनके पेशेवर काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस पर वकीलों और पत्रकारों को उनके पेशेवर काम करने से रोकने के आरोप लगने के बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से कहा कि इन प्रोफेशनल्स को उनके काम में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
कोर्ट ने अपने आदेश में SG के इस भरोसे (निर्देशों के आधार पर) को दर्ज किया कि वकीलों, पत्रकारों और दूसरे प्रोफेशनल्स को उनके पेशेवर काम करने में कोई रुकावट नहीं आएगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए शहर में लोगों की आवाजाही की इजाज़त दी जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील के.के. वेणुगोपाल, कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी और संजय हेगड़े और SCAORA के प्रेसिडेंट देवव्रत यादव ने वकीलों और पत्रकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। उनके दावों के मुताबिक, 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ वकीलों को उनके क्लाइंट्स की मदद करने से रोका गया और पुलिस स्टेशन में उनके साथ मारपीट भी की गई।
सीनियर वकील शादान फरासत ने भी कोर्ट को बताया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई थी। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे थे कि राजधानी बस 'पुलिस स्टेट' बनने ही वाली थी।
सीनियर वकील हेगड़े ने यह भी कहा कि बार के लीडर के तौर पर SG तुषार मेहता को यह पक्का करना चाहिए कि सभी वकील अपने क्लाइंट्स से मिल सकें और उन्हें मदद दे सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि कल पुलिस स्टेशनों में वकीलों के साथ मारपीट की गई और उन्हें FIR दर्ज करने की धमकी दी गई।
आखिरकार बेंच ने अंतरिम उपाय के तौर पर ऊपर बताया गया आदेश जारी किया, जब तक कि अधिकारी मंगलवार को अपना जवाब लेकर नहीं आते।
Case Title : Shailendra Mani Tripathi v Govind Mohan