आय से अधिक संपत्ति मामलों में केवल सरकारी सर्कुलर से 'सोना रखने का अधिकार' साबित नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनकम टैक्स के सर्कुलर और प्रेस रिलीज, जो एक निश्चित सीमा तक सोना रखने की अनुमति देते हैं, उनका इस्तेमाल आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सोना रखने के स्पष्टीकरण के तौर पर नहीं किया जा सकता।
दूसरे शब्दों में, आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी कोई सरकारी कर्मचारी, केवल विभागीय प्रेस रिलीज या सर्कुलर का हवाला देकर यह नहीं कह सकता कि उसके पास मौजूद सोना तय सीमा के भीतर है, इसलिए वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सोना रखना और उसका हिसाब-किताब (अकाउंटिंग) देना दो अलग-अलग बातें हैं; इसलिए सोने का हिसाब-किताब प्रेस रिलीज या सर्कुलर के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।
जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने पटना हाईकोर्ट का वह फैसला पलट दिया, जिसमें 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' (Act) के तहत प्रतिवादी (पूर्व बाल विकास परियोजना अधिकारी) के खिलाफ चल रही कार्यवाही रद्द की गई। प्रतिवादी पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का आरोप था।
हाईकोर्ट ने 11 मई 1994 के निर्देश संख्या 1916 और वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) की 1 दिसंबर 2016 की एक प्रेस रिलीज को आधार बनाकर कार्यवाही रद्द की। इन नियमों के अनुसार, विवाहित महिला 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम तक सोना रख सकते हैं।
हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि प्रतिवादी और उसकी अविवाहित बेटी के पास कुल 646.400 ग्राम सोने के आभूषण थे (जो कि सर्कुलर और प्रेस रिलीज में तय सीमा के भीतर है), कहा कि प्रतिवादी को सोना रखने का अधिकार था; इसलिए, इस अधिनियम के तहत उन पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सरकार का तर्क है कि आय से अधिक संपत्ति का पता लगाने और इस अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए इन सर्कुलर का कोई लेना-देना नहीं है। राज्य के तर्कों में दम पाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादी के खिलाफ चल रही कार्यवाही में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप को अनुचित माना।
कोर्ट ने कहा,
"...हमें लगता है कि हाईकोर्ट का तर्क पूरी तरह से बेबुनियाद है। इस कानून की धारा 13(1)(e) और धारा 13(2) के तहत चल रहे मुकदमे में, आरोपी को अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति रखने के आरोपों पर स्पष्टीकरण देना होता है। केवल कुछ ऐसी प्रेस विज्ञप्तियां या सर्कुलर दिखा देना, जो एक निश्चित सीमा तक सोना रखने की अनुमति देते हों, इन संपत्तियों के होने का उचित हिसाब नहीं माना जा सकता।"
परिणामस्वरूप, अपील स्वीकार की गई और प्रतिवादी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्यवाही फिर से बहाल हो गई।
Case Title : STATE OF BIHAR VS. PHULPARI KUMARI