सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रैफिक का बकाया जुर्माना वसूलने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया। इन कदमों में रैंडम चेकिंग के दौरान बिना भुगतान वाले ई-चालान वाले वाहनों को ज़ब्त करना और बकाया राशि का भुगतान होने तक वाहनों से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को रोकना शामिल है।

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ हज़ारों ई-चालान जारी करने से कोई खास फ़ायदा नहीं होगा, जब तक कि अधिकारी जुर्माने की वसूली सुनिश्चित न करें। कोर्ट को बताया गया कि देश भर में जारी ई-चालान के तहत लगभग 49,194.05 करोड़ रुपये की वसूली होनी बाकी थी, जिसमें से 26,175.05 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके हैं।

ये निर्देश 28 सितंबर को सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले 'एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ' में दिए गए, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट 2012 से कर रहा है।

कोर्ट ने कहा,

"जिस व्यक्ति पर एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप है, उसे सिर्फ़ ई-चालान जारी करते रहना काफ़ी नहीं है। पुलिस ऐसे हज़ारों-लाखों ई-चालान जारी कर सकती है, लेकिन सवाल यह है कि उन ई-चालान के ज़रिए लगाए गए जुर्माने की वसूली कैसे की जाए।"

बेंच ने निर्देश दिया कि वाहनों की रैंडम चेकिंग की जाए और अगर यह पाया जाता है कि किसी वाहन के खिलाफ़ जारी ई-चालान का भुगतान नहीं किया गया, तो उस वाहन को ज़ब्त करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएं।

बेंच ने आदेश दिया,

"हम यह भी निर्देश देते हैं कि वाहनों की रैंडम चेकिंग की जाए और अगर यह पाया जाता है कि जारी ई-चालान का पालन या भुगतान नहीं किया गया है, तो वाहन को ज़ब्त करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएं।"

वाहनों को ज़ब्त करने के अलावा, कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बिना भुगतान वाले ई-चालान की वसूली के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया। इनमें वाहन से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को रोकना, मालिकाना हक के ट्रांसफर को रोकना, फिटनेस और PUC सर्टिफिकेट देने से इनकार करना और 'परिवहन पोर्टल' पर वाहनों को ब्लैकलिस्ट करना शामिल है।

कोर्ट ने आदेश दिया,

“जुर्माना वगैरह वसूलने के लिए अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे उन गाड़ियों की ऑनलाइन सर्विस रोक दें जिन पर बकाया रकम है। अधिकारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को रिन्यू करने या डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने से रोकेंगे और मालिक का पता वगैरह अपडेट करने की किसी भी रिक्वेस्ट पर विचार नहीं करेंगे। अधिकारी फिटनेस सर्टिफिकेट भी तब तक नहीं देंगे जब तक कि ट्रैफिक का सारा बकाया जुर्माना पूरी तरह से चुका न दिया जाए और साथ ही संबंधित गाड़ी को 'परिवहन पोर्टल' पर ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। अगर संबंधित व्यक्ति अपनी गाड़ी बेचना चाहता है तो यह उसके लिए रुकावट बनेगी। अधिकारियों को गाड़ी की ओनरशिप ट्रांसफर को भी ब्लॉक करने की कार्रवाई करनी चाहिए। कई बार नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस को रिन्यू होने से रोका जाएगा और जो ड्राइविंग लाइसेंस अभी चालू है, उसे भी सस्पेंड करने के उपाय किए जाएंगे। सबसे ज़रूरी बात यह है कि किसी भी सेंटर को PUC सर्टिफिकेट जारी करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।”

कोर्ट ने यह सिस्टम लागू करने का आदेश तब दिया, जब उसने देखा कि मौजूदा सिस्टम—जिसमें आमतौर पर जुर्माना वसूलने के लिए ई-चालान संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली कोर्ट को भेजे जाते हैं—बढ़ते हुए पेंडिंग चालानों को देखते हुए नाकाफी होगा।

कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी कि अगर बार-बार दिए गए निर्देशों को ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया, तो उनका कोई खास असर नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा,

“हम अनिश्चित काल तक निर्देश जारी करते रह सकते हैं, लेकिन अगर ये सभी निर्देश सिर्फ़ कागज़ों पर ही रह जाते हैं और अंततः अधिकारियों द्वारा लागू नहीं किए जाते हैं, तो एक दिन हमें कोई सख़्त कदम उठाना पड़ सकता है जो शायद अधिकारियों को पसंद न आए।”

अन्य निर्देशों में ये शामिल हैं:

1. AI-आधारित इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट

कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और सड़क की देखरेख करने वाली अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि कानूनी ढांचे के तहत लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिस्टम AI-इनेबल्ड हों और सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के नियम 167A(3) में बताई गई 12 तरह की उल्लंघनों का पता लगाने में सक्षम हों। इन सिस्टम का मकसद पूरे देश में कानून के अनुसार ई-चालान जारी करने की सुविधा देना है।

2. नेशनल रोड सेफ्टी सिस्टम और डेटा इंटीग्रेशन

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा तैयार 28 अक्टूबर, 2025 की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को लागू करते समय कोर्ट ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह इस बात की जांच करे कि अक्टूबर 2023 के NCRB कॉन्सेप्ट पेपर/प्लान में दी गई सिफारिशों को मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 136A के तहत देश भर में इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट को मजबूत करने के लिए एक सप्लीमेंट्री एक्शन प्लान में कैसे शामिल किया जा सकता है। यह धारा नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और खास शहरी इलाकों में सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और एनफोर्समेंट को अनिवार्य बनाती है।

प्रस्तावित ढांचे में एक नेशनल रोड सेफ्टी सिस्टम, एक उचित संस्थागत और फंडिंग मैकेनिज्म और एनफोर्समेंट व सड़क सुरक्षा डेटा के रियल-टाइम एक्सचेंज के लिए VAHAN-4, SARATHI, e-Challan, e-DAR, IRAD और राज्य/केंद्रीय ट्रैफिक कंट्रोल रूम का इंटरऑपरेबल इंटीग्रेशन शामिल है।

3. मासिक पब्लिक डैशबोर्ड का आदेश

पारदर्शिता लाने के लिए कोर्ट ने MoRTH को एक पब्लिक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया, जो मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 136A (CMVR के नियम 167A और 28 अक्टूबर, 2025 की SOP के साथ) के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।

डैशबोर्ड राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और नेशनल हाईवे कॉरिडोर के हिसाब से जानकारी देगा, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट के लिए पहचाने गए कॉरिडोर; इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस की संख्या और काम करने की स्थिति; निगरानी की जा रही उल्लंघनों की श्रेणियां; और पता चली उल्लंघनों के मुकाबले जारी किए गए ई-चालान।

इस जानकारी को कम से कम महीने में एक बार अपडेट किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सालाना डेटा MoRTH की "भारत में सड़क दुर्घटनाएं" (Road Accidents in India) रिपोर्ट का हिस्सा हो सकता है।

(नोट: कोर्ट का यह सुझाव कि बकाया ई-चालान की रकम बिजली बिलों से वसूली जानी चाहिए, एक मौखिक टिप्पणी थी, न कि अपलोड किए गए आदेश का हिस्सा।)

Case Title : S.RAJASEEKARAN VERSUS UNION OF INDIA AND ORS. & ORS.

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