"इच्छित उपयोग" पर आधारित एक्साइज ड्यूटी छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि "उपयोग" या "इच्छित उपयोग" पर आधारित एक्साइज छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह माना कि एक बार जब माल का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य के लिए कर लिया जाता है तो इस बात से कि उसका एक हिस्सा संयोगवश अन्य गतिविधियों के लिए भी उपयोग में आ गया है, करदाता छूट का दावा करने के अधिकार से वंचित नहीं हो जाता।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के खिलाफ एक्साइज ड्यूटी की मांग रद्द की। खंडपीठ ने यह माना कि छूट से केवल इस आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता कि उर्वरक निर्माण के लिए प्राप्त नेफ्था से प्राप्त उत्पादन का एक हिस्सा, गैर-उर्वरक उद्देश्यों के लिए बिजली बनाने में उपयोग किया गया।
अपीलकर्ता राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, एक्साइज अधिकारियों से CT-2 प्रमाण पत्र प्राप्त करने और यह घोषणा करने के बाद कि प्राप्त इनपुट का उपयोग उर्वरक या अमोनिया के निर्माण में किया जाएगा, छूट अधिसूचनाओं के तहत लाभ का दावा करते हुए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) से शून्य ड्यूटी दर पर नेफ्था प्राप्त कर रहा था। उक्त नेफ्था का उपयोग प्राकृतिक गैस के साथ-साथ स्टीम उत्पादन संयंत्र में भाप बनाने के लिए ईंधन के रूप में भी किया जाता था।
विवाद तब उत्पन्न हुआ, जब राजस्व अधिकारियों ने यह आरोप लगाया कि नेफ्था से उत्पन्न कुछ भाप का उपयोग गैर-उर्वरक इकाइयों में और ग्रिड को आपूर्ति की जाने वाली बिजली के लिए किया गया, जिससे छूट की शर्तों का उल्लंघन हुआ।
इसी आधार पर अपीलकर्ता को कई 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए गए, जिनमें नवंबर, 1996 से मार्च, 2001 की अवधि के लिए 28,55,95,491.00 रुपये की ड्यूटी की मांग की गई। इन नोटिसों में यह आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता द्वारा प्राप्त नेफ्था का उपयोग न केवल उर्वरक के निर्माण में बल्कि अन्य रसायनों के निर्माण में भी किया जा रहा था; जिससे अपीलकर्ता उक्त अधिसूचना के तहत शून्य ड्यूटी दर का लाभ पाने के लिए अयोग्य हो गया।
CESTAT के निष्कर्षों से व्यथित होकर (जिसने काफी हद तक इस मांग को सही ठहराया), अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस मांग को रद्द करते हुए जस्टिस भुइयां द्वारा लिखे गए फैसले में यह टिप्पणी की गई कि प्राप्त वस्तु का अप्रत्यक्ष या सहायक उपयोग छूट के अधिकार को समाप्त नहीं करता है, विशेष रूप से उन एकीकृत औद्योगिक प्रक्रियाओं में, जहां इनपुट के उपयोग का सटीक पृथक्करण करना अव्यावहारिक होता है।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
“यह बिल्कुल साफ़ है कि HPCL से जो नेफ़्था खरीदा गया, उसका मकसद अपीलकर्ता द्वारा खाद और अमोनिया बनाने में इस्तेमाल करना था। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि खरीदे गए नेफ़्था का एक छोटा सा हिस्सा बिजली बनाने में इस्तेमाल करना पड़ा, जिसका ज़्यादातर हिस्सा भी खाद और अमोनिया बनाने में ही इस्तेमाल हुआ, लेकिन उसका कुछ हिस्सा केमिकल प्लांट में भी इस्तेमाल करना पड़ा और साथ ही महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को भी सप्लाई करना पड़ा। अगर स्थिति ऐसी है तो अपीलकर्ता छूट की सूचनाओं के तहत ड्यूटी की रियायती दर का फ़ायदा उठाने का हकदार होगा।”
कोर्ट ने आगे कहा,
“सिर्फ़ इसलिए कि नेफ़्था और नैचुरल गैस को भाप बनाने के लिए एक ही स्टीम जेनरेशन प्लांट में डाला गया, जिससे यह पता लगाना नामुमकिन हो गया कि कौन सा ईंधन आखिर फ़ैक्टरी के किस हिस्से में पहुंचता है, यह नहीं कहा जा सकता कि नेफ़्था खाद और अमोनिया बनाने में इस्तेमाल करने के इरादे से नहीं खरीदा गया। सिर्फ़ इसलिए कि नेफ़्था की आख़िरी मंज़िल पक्के तौर पर तय नहीं की जा सकी, छूट का फ़ायदा देने से मना नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब अपीलकर्ता ने सेंट्रल एक्साइज़ रूल्स, 1944 के चैप्टर X में बताए गए तरीके का लगातार पालन किया।”
इसके समर्थन में State of Haryana Vs. Dalmia Dadri Cement Limited, 1987 Supp SCC 679 का हवाला दिया गया, जिसमें बिजली बनाने या बांटने के मकसद से बेचे गए 'सीमेंट' को Punjab General Sales Tax Act, 1948 के तहत करदाता को छूट दी गई।
कोर्ट ने उसमें फ़ैसला दिया कि करदाता छूट का फ़ायदा पाने का हकदार होगा, क्योंकि सप्लाई किए गए सीमेंट का मकसद सीधे तौर पर बिजली बनाने या बांटने में इस्तेमाल करना था। कोर्ट ने आगे फ़ैसला दिया कि भले ही सप्लाई किए गए सीमेंट का कुछ हिस्सा असल में उन कामों में इस्तेमाल हुआ हो, जो सीधे तौर पर बिजली बनाने या बांटने से जुड़े नहीं थे, फिर भी छूट मिलने के मामले में इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा।
ऊपर बताई गई बातों के आधार पर अपील मंज़ूर कर ली गई, यह मानते हुए कि अपीलकर्ता ने नेफ़्था खाद बनाने के इरादे से खरीदा था, जिससे वह एक्साइज़ ड्यूटी से छूट का फ़ायदा पाने का हकदार हो गया।
Cause Title: M/S. RASHTRIYA CHEMICALS AND FERTILIZERS LIMITED VERSUS COMMISSIONER OF CENTRAL EXCISE AND SERVICE TAX (LTU)