सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस अंदाज़े या आशंका के आधार पर 'एंटी-सूट इंजंक्शन' (मुकदमा रोकने का आदेश) नहीं दिया जा सकता कि विदेशी कोर्ट अंततः ऐसे आधार पर आदेश (डिक्री) दे सकता है, जिसे भारतीय वैवाहिक कानून के तहत मान्यता नहीं है, इसलिए उस आदेश को भारत में लागू नहीं किया जा सकेगा।

जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पति की वह अपील खारिज की, जो कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ थी। हाईकोर्ट ने अलीपुर कोर्ट के उस आदेश में दखल दिया था, जिसमें पति के पक्ष में 'एंटी-सूट इंजंक्शन' दिया गया था। अलीपुर कोर्ट ने पत्नी को लंदन, इंग्लैंड में फैमिली कोर्ट के सामने पति के खिलाफ वैवाहिक और भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की कार्यवाही करने से रोक दिया था।

हाईकोर्ट का फैसला सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'एंटी-सूट इंजंक्शन' का आदेश केवल इस संभावना पर नियमित रूप से पारित नहीं किया जा सकता कि विदेशी कोर्ट ऐसा आदेश देगा जिसे भारत में मान्यता नहीं मिलेगी और इसलिए भारत में लागू नहीं किया जा सकेगा।

नतीजतन, अपील खारिज की गई।

Cause Title: MIHIR PRAKASH BAJORIA VERSUS VIDUSHI JAIN BAJORIA

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