राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर पालिका आम चुनाव 2026 के लिए वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने को चुनौती देने वाली व्यक्ति की याचिका खारिज की। कोर्ट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 243-ZG के तहत लगाई गई रोक का हवाला दिया।

आर्टिकल 243 ZG अदालतों को नगर पालिका चुनावों से जुड़े मामलों में दखल देने से रोकता है।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि यह मामला आने वाले नगर पालिका चुनावों में वोट डालने से जुड़ा है, जिसके लिए राजस्थान राज्य चुनाव आयोग ने पहले ही विस्तृत चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है, इसलिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

बता दें, याचिकाकर्ता का कहना था कि वोटर लिस्ट प्रकाशित होने से पहले उसका नाम उसमें शामिल था। हालांकि, आरोप है कि बिना किसी आधार और सुनवाई का मौका दिए उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया, जो लागू कानूनों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

कोर्ट ने एन.पी. पोन्नुस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर, नमक्कल निर्वाचन क्षेत्र और अन्य तथा मोहिंदर सिंह गिल बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त, नई दिल्ली के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। इन फैसलों में कहा गया कि एक बार जब चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी करके चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है, तो अदालत उसमें कोई दखल नहीं दे सकती।

इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने कहा,

"...राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई। इसलिए भारत के संविधान के आर्टिकल 243-ZG के तहत दी गई रोक अपने आप लागू हो जाती है। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस चरण में ऊपर बताए गए मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए याचिकाकर्ता द्वारा उठाई गई शिकायत पर यह अदालत सुनवाई नहीं कर सकती।"

इसके अनुसार, याचिका खारिज कर दी गई।

Case Title : Kuldeep Kumar v State of Rajasthan & Ors

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