राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या की जांच में पुलिस की 'जानबूझकर' की गई चूक की ओर इशारा किया, नाबालिग आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज की

Update: 2026-07-06 13:53 GMT

पुलिस की जांच में 'जानबूझकर' चूक की आशंका जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के मामले में 13 साल के आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज करने का फैसला बरकरार रखा। [2026 LiveLaw (Raj) 268]

जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा उस समय पोस्टमार्टम न कराने के लिखित इनकार के बावजूद, परिवार को शव सौंपते समय पंचनामा करना पुलिस का कर्तव्य था।

कोर्ट ने कहा,

"...हालांकि शिकायतकर्ता ने उस समय हाथ से लिखा पत्र देकर पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया, लेकिन अस्पताल में मौजूद पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य था कि वह पंचनामा करे; उसने अंतिम संस्कार के लिए शिकायतकर्ता और परिवार के अन्य सदस्यों को शव सौंपते समय ऐसा नहीं किया। पुलिस की ओर से एक गंभीर चूक हुई है, जो मामले की जांच में जानबूझकर की गई लगती है।"

बता दें, आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की गई। आरोपी का पक्ष यह था कि घटना की तारीख से एक महीने की लंबी देरी के बाद FIR दर्ज की गई।

उस समय शिकायतकर्ता (मृतक के पिता) ने खुद SHO को एक लिखित पत्र दिया। उन्होंने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई शिकायत नहीं होने की बात कही थी और मृतक का पोस्टमार्टम या किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई पर ज़ोर नहीं दिया। इसलिए कोई पोस्टमार्टम नहीं किया गया।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि FIR एक महीने बाद दर्ज की गई, जो बाद में सोची-समझी कार्रवाई के तहत की गई थी, जिसमें पुलिस ने नेगेटिव फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी।

इस फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दायर की गई और आरोपी के खिलाफ संज्ञान लिया गया। आरोपी को ज़मानत पर रिहा करने की मांग करते हुए यह रिविज़न पिटीशन (पुनरीक्षण याचिका) दायर की गई।

इसके विपरीत, राज्य ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों ने जांच में हेरफेर किया और पोस्टमार्टम नहीं होने दिया। साथ ही अंतिम संस्कार भी देर रात जल्दबाजी में किया गया।

शिकायतकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा कोई निष्पक्ष जांच नहीं की गई और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना शव परिवार को सौंप दिया गया। दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि अस्पताल में मौजूद पुलिस अधिकारी द्वारा पंचनामा न करना पुलिस की एक गंभीर चूक थी और ऐसा जानबूझकर किया गया लगता है।

इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी नाबालिग की ज़मानत याचिका खारिज की।

Title: Conflict with law Juvenile X v State of Rajasthan

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