रील बनाकर लोकप्रियता हासिल करना पुलिस अधिकारी का गंभीर कदाचार: राजस्थान हाईकोर्ट, DGP को जांच के आदेश

Update: 2026-07-25 09:30 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर रील बनाकर लोकप्रियता हासिल करने के आरोपों में एक पुलिस निरीक्षक के खिलाफ जांच के आदेश दिए।

अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी द्वारा अपने बेटे के साथ रील बनाना और उन्हें सोशल मीडिया मंचों पर साझा कर प्रशंसकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास बेहद गंभीर कदाचार है।

जस्टिस अशोक कुमार जैन ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पूरे मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।

मामला एक जमानत याचिका से जुड़ा था जिसमें आरोपी पर लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया।

आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता, जो यातायात पुलिस में पुलिस निरीक्षक के पद पर तैनात है, अपने बेटे के साथ रील बनाने का शौक रखता है। घटना वाले दिन शिकायतकर्ता ने आरोपी की कार रोकी और उसका बेटा कथित तौर पर एक नाटकीय रील बनाने के लिए अचानक कार के सामने आ गया। इसी दौरान वह वाहन की चपेट में आकर घायल हो गया।

इसके बाद आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने सड़क पर खतरनाक स्टंट करते हुए शिकायतकर्ता के बेटे को घायल कर दिया। आरोपी ने दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी और घायल युवक एक-दूसरे को पहले से जानते तक नहीं थे। ऐसे में घटना के पीछे किसी आपराधिक मंशा का प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं बनता।

अदालत ने यह भी माना कि जांच पूरी हो चुकी है और अब आरोपी की हिरासत की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद उसे जमानत दी गई।

हालांकि आदेश के अंत में हाईकोर्ट ने पुलिस निरीक्षक के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,

"एक पुलिस निरीक्षक का अपने बेटे की मदद से रील बनाना और उन्हें इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर शेयर कर प्रशंसकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास अपने आप में बेहद गंभीर कदाचार है।"

इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने DGP राजस्थान को पूरे मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

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