CLAT टॉपर को लेकर कोचिंग संस्थानों के विवाद में FIR जांच पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक

Update: 2026-01-16 09:16 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने CLAT (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) में उच्च ऑल इंडिया रैंक (AIR) हासिल करने वाली नाबालिग छात्रा से जुड़े विवाद में दर्ज आपराधिक मामले की आगे की जांच पर रोक लगा दी है। यह विवाद दो CLAT कोचिंग संस्थानों के बीच छात्रा को मेंटर करने के दावे को लेकर उत्पन्न हुआ था।

इस मामले में दर्ज FIR में आरोप लगाया गया था कि छात्रा के पिता ने एक प्रतिस्पर्धी कोचिंग संस्थान से मिले कथित लाभकारी प्रस्ताव का हवाला देकर मूल संस्थान पर दबाव बनाने की कोशिश की, जो कथित रूप से धमकी और ब्लैकमेलिंग के दायरे में आता है।

अदालत की टिप्पणी

जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी करते हुए कहा कि यह विवाद आपराधिक प्रकृति का कम और कोचिंग संस्थानों के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का अधिक प्रतीत होता है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे विवादों में किसी छात्र को शामिल नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से तब जब मामला एक नाबालिग से जुड़ा हो।

कोर्ट ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों को आपराधिक मुकदमेबाजी का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

मध्यस्थता का निर्देश

मामले की प्रकृति को देखते हुए, हाईकोर्ट ने इसे मध्यस्थता (Mediation) के लिए भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता को मध्यस्थता की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होना होगा।

राजस्थान हाईकोर्ट मध्यस्थता केंद्र में मामले की सुनवाई 21 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है और मध्यस्थता केंद्र को 16 फरवरी 2026 तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच पर अंतरिम रोक

मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक Crime No. 04/26 के तहत दर्ज FIR की आगे की जांच स्थगित रहेगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पक्षकारों को मध्यस्थता स्तर पर ही विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशना चाहिए, ताकि मामले का अनावश्यक विस्तार और आगे की न्यायिक कार्यवाही से बचा जा सके।

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