सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध: 36 माइक्रोन शराब लेबल टेंडर पर राजस्थान हाइकोर्ट ने आबकारी विभाग से जवाब मांगा
राजस्थान हाइकोर्ट ने 36 माइक्रोन मोटाई वाले प्लास्टिक शराब लेबल की खरीद के लिए जारी टेंडर को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग को नोटिस जारी किया।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संज़ीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा कि विज्ञापन में 50 माइक्रोन के बजाय 36 माइक्रोन मोटाई वाले होलोग्राम की मांग क्यों की गई।
पूरा मामला
जनहित याचिका में कहा गया कि राज्य ने ई-निविदा जारी कर लगभग 600 करोड़ पॉलिएस्टर आधारित रंगीन सुरक्षा होलोग्राम (आबकारी चिपकने वाले लेबल) की आपूर्ति का प्रस्ताव रखा है। ये लेबल शराब और बीयर की बोतलों व कैनों पर लगाए जाने हैं और इनकी मोटाई 36 माइक्रोन निर्धारित की गई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कदम प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के नियम 4(ड) का उल्लंघन है जिसमें प्लास्टिक की न्यूनतम मोटाई 50 माइक्रोन निर्धारित की गई।
याचिका में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के विभिन्न निर्णयों में भी पर्यावरण संरक्षण के मानकों को सख्ती से लागू करने पर बल दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य जानबूझकर एकल उपयोग प्लास्टिक पर राष्ट्रीय प्रतिबंध की अनदेखी कर रहा है।
इसमें कहा गया कि 36 माइक्रोन मोटाई वाले ये लेबल न तो एकत्र किए जा सकते हैं और न ही पुनर्चक्रित, जिससे वे सूक्ष्म प्लास्टिक कणों में टूटकर पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाएंगे।
याचिका में यह भी कहा गया कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के पर्यावरण सचिव पहले ही 36 माइक्रोन विनिर्देश को कानूनी रूप से अस्वीकार्य बता चुके हैं, इसके बावजूद यह निविदा जारी की गई।
याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई जारी रही तो यह अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन होगी। साथ ही, एहतियाती सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत की भी अवहेलना होगी।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि अन्य राज्यों में इसी प्रकार के प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर रद्द किए जा चुके हैं, जिससे एक समान राष्ट्रीय पर्यावरण मानक स्थापित हो चुका है, जिसका राजस्थान पालन नहीं कर रहा।
हाइकोर्ट ने राज्य से जवाब तलब करते हुए मामले को 17 मार्च, 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।