कुंभलगढ़ किले के पास पुराने घरों की मरम्मत और विस्तार की अनुमति, नई नींव पर निर्माण नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

Update: 2026-08-12 07:31 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने कुंभलगढ़ किले के आसपास पीढ़ियों से रह रहे लोगों को राहत देते हुए कहा कि पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा के नाम पर वर्षों से मौजूद घरों में रहने वाले लोगों को वहां से नहीं हटाया जा सकता।

अदालत ने मौजूदा पुराने घरों की मरम्मत और उन्हीं संरचनाओं के ऊपर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी है, लेकिन नई नींव डालकर नया निर्माण करने पर रोक बरकरार रखी है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि राजस्थान के किलों और उनके आसपास लोगों का रहना कोई नई बात नहीं है। जो लोग सदियों से किलों के भीतर या आसपास रह रहे हैं उन्हें केवल पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा का हवाला देकर अपने पुराने घरों की मरम्मत या परिवार बढ़ने के कारण आवश्यक विस्तार से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस आदेश का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि पुरातात्विक स्थलों के आसपास नए निर्माण की अनुमति दी जा रही है।

अदालत ने कहा,

“कोई भी नया निर्माण, जिसमें नई नींव डाली जाती है, अनुमति योग्य नहीं होगा। हालांकि, पुरानी नींव पर खड़े मौजूदा घरों की मरम्मत की जा सकेगी और उन पर आगे निर्माण की भी अनुमति होगी।”

हाईकोर्ट यह टिप्पणी कुंभलगढ़ के गांव गवार के निवासियों द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कर रहा था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से गांव की आबादी वाले क्षेत्र में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने घरों की मरम्मत करने या बढ़ते परिवार के लिए अतिरिक्त कमरे बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि ग्रामीणों को प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों में आरोप लगाया गया कि ग्रामीणों के मकान कुंभलगढ़ किले के पुरातात्विक क्षेत्र के किनारे स्थित हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राजस्थान के किलों में या उनके आसपास आवासीय बस्तियां होना कोई असामान्य बात नहीं है। इसलिए पुरातात्विक धरोहर की सुरक्षा और वहां लंबे समय से रह रहे लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

अदालत ने कहा,

“पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा की जानी चाहिए, लेकिन यदि किसी पुरातात्विक स्थल से सटे या उससे जुड़े अलग-अलग मकान पहले से मौजूद हैं, तो उन्हें भी उचित संरक्षण दिया जाना चाहिए।”

खंडपीठ ने साथ ही राज्य को चेताया कि पुराने मकानों को संरक्षण देने के नाम पर नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने स्पष्ट किया कि नई नींव डालकर बनाया जाने वाला कोई भी नया मकान या निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा।

वहीं, पुराने मकानों की मरम्मत और मौजूदा ढांचे के ऊपर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी गई है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को लागू भवन नियमों के अनुसार आवश्यक अनुमति लेनी होगी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त निर्माण की अनुमति का उपयोग किसी भी तरह मौजूदा पुरातात्विक क्षेत्र में अतिक्रमण करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।

खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा मकानों की मरम्मत और उनमें आवश्यक विस्तार की अनुमति केवल पुराने ढांचे और उसकी मौजूदा नींव तक सीमित रहेगी।

इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ राजस्थान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण किया।

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