पिता के घर लौटने से नाबालिग बेटी का इनकार, राजस्थान हाइकोर्ट ने बालिका गृह में रहने की दी अनुमति

Update: 2026-03-06 08:35 GMT

राजस्थान हाइकोर्ट ने नाबालिग लड़की को बालिग होने तक बालिका गृह में रहने की अनुमति दी। लड़की ने अदालत के सामने अपने माता-पिता के पास लौटने से इनकार करते हुए कहा था कि उसे उनके द्वारा प्रताड़ित किए जाने का डर है और उसके पिता कथित रूप से कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल हैं।

जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनकी नाबालिग बेटी को प्रतिवादी द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।

सुनवाई के दौरान जब लड़की को अदालत के सामने पेश किया गया तो उसने साफ तौर पर कहा कि वह अपने घर वापस नहीं जाना चाहती। उसने बताया कि उसके पिता कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और उसे अपने माता-पिता द्वारा प्रताड़ना का भय है।

अदालत ने यह भी पाया कि लड़की की मानसिक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है। इसलिए उसे परामर्श और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए बालिका गृह भेजा गया, जहां उसे काउंसलिंग मिल सके।

लड़की ने अदालत के सामने यह भी स्पष्ट किया कि उसे किसी ने अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा। उसने कहा कि वह अपनी इच्छा से घर छोड़कर आई है और बालिग होने तक बालिका गृह में ही रहना चाहती है।

परामर्शदाताओं की रिपोर्ट और लड़की के बयान को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि वह बालिग होने तक बालिका गृह में ही रहेगी। इसके बाद वह अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र होगी।

इन निर्देशों के साथ हाइकोर्ट ने पिता की याचिका का निपटारा किया।

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