दस्तावेज के अभाव में एडमिशन से इनकार गलत, हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को दिलाया दाखिला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में NEET-PG 2025 की अभ्यर्थी को राहत देते हुए उसे कॉलेज में एडमिशन देने का निर्देश दिया। अभ्यर्थी को स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र (परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) न होने के आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया गया।
डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निर्देश या सूचना पुस्तिका (इन्फॉर्मेशन बुलेटिन) किसी वैधानिक नियम को कमजोर या निरस्त नहीं कर सकती।
मामले में याचिकाकर्ता ने MBBS के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अस्थायी पंजीकरण प्राप्त किया और स्थायी पंजीकरण के लिए आवश्यक सेवा भी कर रही थी। इसी दौरान उसने NEET-PG 2025 परीक्षा दी और उसे एक मेडिकल कॉलेज आवंटित हुआ।
लेकिन कॉलेज में रिपोर्ट करने पर उसे यह कहकर प्रवेश नहीं दिया गया कि उसके पास स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र नहीं है।
अदालत ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस, 2000 के नियम 8(3) का हवाला देते हुए कहा कि उम्मीदवार को प्रवेश के बाद एक माह का समय दिया जाता है, जिसमें वह स्थायी पंजीकरण प्राप्त कर सकता है।
कोर्ट ने कहा,
“यह प्रावधान इस उद्देश्य से बनाया गया है कि मेधावी छात्रों को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े जो उस समय पंजीकरण प्रक्रिया में हों।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कानून स्वयं एक माह की अवधि देता है तो राज्य सरकार सूचना पुस्तिका के जरिए उससे अधिक कठोर शर्त नहीं लगा सकती।
हाईकोर्ट ने राज्य के इस कदम को मनमाना और कानून के विरुद्ध बताते हुए कहा कि केवल प्रमाणपत्र न होने के आधार पर प्रवेश से इनकार करना गलत है।
अंततः अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तत्काल एडमिशन दिया जाए।