भरण-पोषण मामले में पत्नी की नौकरी का रिकॉर्ड मंगा सकता है पति: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला

Update: 2026-04-15 07:58 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पति भरण-पोषण के दावे का विरोध करने के लिए पत्नी के रोजगार और आय से जुड़े दस्तावेज अदालत के माध्यम से मंगा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेज निष्पक्ष सुनवाई के लिए जरूरी होते हैं।

जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पति की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया गया था।

मामले में पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की थी। सुनवाई के दौरान पति को जानकारी मिली कि पत्नी प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्स के रूप में कार्यरत है और अच्छी आय अर्जित कर रही है लेकिन उसने यह जानकारी अदालत के सामने प्रकट नहीं की।

पति ने अस्पताल से सीधे जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल ने बिना पत्नी की अनुमति के जानकारी देने से इनकार किया। इसके बाद पति ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 के तहत अदालत से पत्नी की नौकरी और आय से संबंधित दस्तावेज मंगाने का अनुरोध किया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दस्तावेज लाने की जिम्मेदारी पति की है।

हाईकोर्ट ने इस दृष्टिकोण को गलत बताते हुए कहा कि जब दस्तावेज किसी निजी संस्था के पास हों और पक्षकार उन्हें स्वयं प्राप्त करने में असमर्थ हो, तो अदालत के पास उन्हें मंगाने का अधिकार है।

अदालत ने राजनेश बनाम नेहा (2020) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भरण-पोषण के मामलों में दोनों पक्षों पर अपनी आय, संपत्ति और देनदारियों का पूरा और सही खुलासा करना अनिवार्य है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की आय से जुड़े दस्तावेज मामले के निष्पक्ष निर्णय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनका सीधे तौर पर मामले पर प्रभाव पड़ता है।

अदालत ने यह भी माना कि पति ने ईमानदारी से जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन जब उसे सफलता नहीं मिली तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया जो कि उचित कदम था।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि संबंधित अस्पताल से आवश्यक जानकारी मंगाई जाए ताकि मामले का निष्पक्ष निपटारा हो सके।

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