युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत: राजस्थान हाइकोर्ट ने बनाया जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड, कानून की किताबों के लिए मिलेगी सहायता
राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रथम पीढ़ी के युवा वकीलों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक अहम पहल की।
हाइकोर्ट ने जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड के गठन का निर्देश दिया, जिसके माध्यम से कम आयु और सीमित अनुभव वाले वकीलों को कानून की पुस्तकें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।
यह आदेश जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने पारित किया।
अदालत ने कहा कि पहली पीढ़ी के युवा वकीलों के सामने अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने में गंभीर आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियाँ हैं। उनके पास न तो पारिवारिक पृष्ठभूमि का सहारा होता है और न ही पर्याप्त संसाधन। कई वकील प्रैक्टिस शुरू करने के बाद भी परिवार पर निर्भर रहते हैं, जबकि कुछ आर्थिक दबाव के कारण पेशा छोड़ने को विवश हो जाते हैं।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“युवा वकीलों की सहायता करना कोई एहसान नहीं है बल्कि बेहतर न्याय व्यवस्था की आवश्यकता है। वे नई सोच और नई ऊर्जा के साथ व्यवस्था में आते हैं। जब युवा वकील आगे बढ़ते हैं तो अदालतें बेहतर काम करती हैं लेकिन जब वे उपेक्षित महसूस करते हैं तो पूरी व्यवस्था कमजोर हो जाती है।”
पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि युवा वकीलों को अदालत परिसर में बैठने और फाइल तैयार करने के लिए समुचित स्थान तक उपलब्ध नहीं है। कई वकील गलियारों में खड़े होकर काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी गरिमा और कार्य गुणवत्ता प्रभावित होती है।
अदालत ने साझा चैंबर और निश्चित बैठने की व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।
हाइकोर्ट ने कहा कि मार्गदर्शन की कमी भी एक बड़ी समस्या है। सीनियर एडवोकेट द्वारा उचित मार्गदर्शन से पेशे में ईमानदारी और कौशल का विकास होता है।
अदालत ने बार काउंसिल और बार एसोसिएशन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रम, विधिक अद्यतन और डिजिटल शिक्षण साधन उपलब्ध कराएं।
अदालत ने राजस्थान हाइकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को निर्देश दिया कि जूनियर एडवोकेट वेलफेयर फंड के नाम से अलग खाता खोला जाए। इस खाते से 28 वर्ष से कम आयु और 1 से 5 वर्ष की प्रैक्टिस वाले वकीलों को कानून की किताबें खरीदने के लिए 5000 रुपये दिए जाएंगे। पात्र वकीलों की सूची तैयार कर यह राशि पहले आओ पहले पाओ के आधार पर वितरित की जाएगी।
इसके अतिरिक्त राज्य सरकार बार काउंसिल ऑफ राजस्थान तथा जिला स्तर की बार एसोसिएशनों को राजस्थान एडवोकेट्स (एड टू पर्चेज लॉ बुक्स) योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया।
योजना के तहत गठित क्रय समिति पात्र वकीलों को एकमुश्त 5000 रुपये देगी। सहायता प्राप्त करने वाले वकीलों को एक माह के भीतर कानून की पुस्तकों की रसीद प्रस्तुत करनी होगी। अन्य प्रयोजन में राशि खर्च करने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वसूली की जाएगी।
यह आदेश एक विलंब क्षमा याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसे 11,000 रुपये उक्त कोष में जमा कराने की शर्त पर स्वीकार किया गया।
मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च, 2026 को निर्धारित की गई और तब तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
हाइकोर्ट की इस पहल को युवा वकीलों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल उनकी आर्थिक सहायता होगी बल्कि न्याय व्यवस्था में उनकी सक्रिय और सम्मानजनक भागीदारी भी सुनिश्चित हो सकेगी।