राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई पर असंतोष जताया, कहा - कचरा ठीक से न फेंकने पर नागरिकों पर जुर्माना लग सकता है

Update: 2026-03-12 05:07 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई के मामले में नगर निगम के काम-काज पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कुछ ऐसे कदम उठाने का सुझाव दिया, जिनमें उन नागरिकों पर जुर्माना लगाना भी शामिल है, जिन्होंने अपने इलाके से कचरा हटवाने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी नहीं की।

एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की डिवीज़न बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में यह तर्क दिया गया कि नगर निगम द्वारा भर्ती किए गए लगभग 8000 सफ़ाई कर्मचारियों के मुकाबले, ज़मीनी स्तर पर बहुत कम लोग ही काम कर रहे हैं।

आरोप लगाया गया कि ज़्यादातर कर्मचारियों को या तो दफ़्तरों में तैनात किया गया या फिर उनसे सफ़ाई के अलावा दूसरे काम करवाए जा रहे हैं। इस वजह से शहर में सफ़ाई का काम ठीक से नहीं हो पा रहा है।

इसके विपरीत, नगर निगम की वकील ने कहा कि उनके पास हाज़िरी रजिस्टर मौजूद है, जिसमें सफ़ाई कर्मचारियों की उनके-अपने दफ़्तरों में हाज़िरी दर्ज है। उन्होंने इस रजिस्टर को रिकॉर्ड पर रखने के लिए कुछ समय मांगा।

कोर्ट ने वकील को निर्देश दिया कि वे उन सफ़ाई कर्मचारियों का वार्ड-वार ब्योरा दें, जो असल में सफ़ाई का काम कर रहे हैं। साथ ही उन सफ़ाई कर्मचारियों की संख्या के बारे में हलफ़नामा भी पेश करें, जिन्हें सफ़ाई के अलावा दूसरे काम सौंपे गए।

इसके अलावा, सफ़ाई की स्थिति पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने कहा कि नगर निगम से यह उम्मीद की जाती है कि वह ठोस कचरा हटाने, सड़कों और गलियों की सफ़ाई करने, नालियों को साफ़ करने और कचरा उठाने के लिए ठोस कदम उठाए।

आगे कहा गया,

“सभी रिहायशी कॉलोनियों में कचरा डालने के लिए बड़े-बड़े डिब्बे लगाए जाने चाहिए। इन डिब्बों को हर दिन सुबह साफ़ किया जाना चाहिए और हर रिहायशी कॉलोनी से कचरा उठाने के लिए एक समय-सारिणी तय की जानी चाहिए। इसी तरह बाज़ार वाले इलाकों में भी सफ़ाई का काम तय समय पर किया जाना चाहिए। इस बारे में उस इलाके के संबंधित निवासियों/दुकानदारों को पहले से जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे अपना कचरा उस तय जगह पर पहुंचा सकें, जहाँ कचरा इकट्ठा करने के डिब्बे रखे हैं।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि जो नागरिक अपने इलाके से कचरा हटवाने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी नहीं करते, उन पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख़ से पहले कोर्ट में एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए इस मामले को 18 मार्च, 2026 के लिए सूचीबद्ध किया गया।

Title: Vimal Choudhary v the State of Rajasthan, and other connected petitionI

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