पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 24 साल पुराने 'घोषित अपराधी' का आदेश रद्द किया, कहा - आरोपी को कार्यवाही की जानकारी नहीं थी

Update: 2026-05-20 04:23 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को 'घोषित अपराधी' करार देने वाला 24 साल पुराना आदेश रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल की कार्यवाही से उसकी गैरमौजूदगी जानबूझकर नहीं थी, बल्कि उसे इस बारे में जानकारी ही नहीं थी।

जस्टिस राजेश भारद्वाज ने कहा कि याचिकाकर्ता आदेशों के बावजूद गैरमौजूद रहा, क्योंकि उसे चल रही कार्यवाही के बारे में पता ही नहीं था। इसकी वजह यह थी कि वह गुजरात में रह रहा था। लेकिन अब याचिकाकर्ता कार्यवाही में शामिल होने और ट्रायल का सामना करने के लिए उत्सुक और तैयार है।

कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसे खिलू राम नाम के एक व्यक्ति ने दायर किया। याचिका में 4 अप्रैल, 2002 को सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करने की मांग की गई। इस आदेश के तहत, 1997 में मोहाली पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 279 और 304-A के तहत दर्ज एक FIR में उसे 'घोषित अपराधी' करार दिया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उसे 1999 में जमानत पर रिहा कर दिया गया। उसके बाद उसे लगा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने के बाद मामला सुलझ गया। आगे यह भी तर्क दिया गया कि वह रोजी-रोटी कमाने के लिए गुजरात चला गया और उसे किसी भी लंबित कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि 'घोषित अपराधी' का आदेश CrPC की धारा 82 का पालन किए बिना पारित किया गया, और उसे न तो सामान्य तरीके से और न ही किसी अन्य वैकल्पिक तरीके से नोटिस तामील कराया गया।

इस याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता कोर्ट के निर्देशों के बावजूद गैरमौजूद रहा और उसे सही ही 'घोषित अपराधी' करार दिया गया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की गैरमौजूदगी का कारण शायद यह था कि वह राज्य से बाहर रह रहा था। उसे चल रही कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ट्रायल में शामिल होने की उसकी इच्छा को देखते हुए, कोर्ट ने विवादित आदेश को रद्द करना उचित समझा।

हालांकि, कोर्ट ने यह राहत एक शर्त के साथ दी। याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर 'पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट डिस्पेंसरी वेलफेयर फंड' में ₹25,000 की राशि जमा करनी होगी।

कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता 10 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होता है, और जुर्माने की राशि जमा करने का सबूत दिखाते हुए जमानत याचिका दायर करता है तो कोर्ट की संतुष्टि के अधीन उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। याचिकाकर्ता को 10 दिनों की अवधि के लिए गिरफ्तारी से भी सुरक्षा प्रदान की गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन शर्तों का पालन न करने पर उसे 'घोषित अपराधी' करार देने वाला 2002 का आदेश फिर से लागू हो जाएगा और उसे दी गई सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।

Title: Khilu Ram @ Khelo Ram v. State of Punjab

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