बिल्डर की लापरवाही का खामियाजा नहीं भुगतेंगे खरीदार: हाईकोर्ट ने 500 से अधिक परिवारों को अस्थायी बिजली देने का दिया आदेश

Update: 2026-06-08 12:52 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जीरकपुर स्थित सुषमा वेलेंसिया अपार्टमेंट परियोजना में रहने वाले 500 से अधिक परिवारों को बड़ी राहत देते हुए अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच लोगों को केवल तकनीकी औपचारिकताओं के कारण बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं रखा जा सकता।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा,

"देश के नागरिक एक कल्याणकारी राज्य में रहते हैं और उन्हें व्यवस्था या प्रशासन की विफलता के कारण बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता। भीषण गर्मी में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोगों को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।"

याचिका सुषमा वेलेंसिया अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की ओर से दायर की गई, जो परियोजना में रहने वाले 500 से अधिक परिवारों का प्रतिनिधित्व करती है।

एसोसिएशन का आरोप है कि परियोजना विकसित करने वाली कंपनी सुषमा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड परियोजना को अधूरा छोड़कर गायब हो गई, जिसके कारण निवासियों को नियमित बिजली कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।

सुनवाई के दौरान पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने बताया कि यदि निवासी सामूहिक रूप से 4.44 करोड़ रुपये जमा कर दें तो बिजली कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा 43.55 लाख रुपये की अतिरिक्त दंडात्मक राशि भी देय है।

इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि यह वित्तीय जिम्मेदारी निवासियों की नहीं बल्कि परियोजना छोड़कर फरार हुए बिल्डर की है।

एसोसिएशन ने बताया कि 900 फ्लैटों वाली परियोजना में करीब 700 इकाइयों का निर्माण हो चुका है और लगभग 125 फ्लैटों में पहले से बिजली आपूर्ति हो रही है। ऐसे में निवासियों के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना संभव नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई घर खरीदने में लगाई है और उन्हें बिल्डर की गलती का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी कि बिल्डरों को लाइसेंस और अनुमति देते समय ऐसे मामलों से निपटने के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था तैयार की जाती।

जस्टिस वशिष्ठ ने कहा कि बिल्डर आकर्षक योजनाएं दिखाकर लोगों से करोड़ों रुपये निवेश करवाते हैं और बाद में परियोजना छोड़कर गायब हो जाते हैं, जिससे खरीदार बिना किसी गलती के परेशानियों का सामना करते हैं।

मामले में हाईकोर्ट ने PSPCL के वरिष्ठ अधिकारियों और ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (गमाडा) सहित संबंधित सरकारी विभागों को बैठक कर स्थायी समाधान तलाशने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अपार्टमेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को भी बैठक में बुलाया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी। तब तक हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत निर्देश दिया कि प्रत्येक निवासी सामान्य शुल्क के साथ 20 हजार रुपये जमा कर अस्थायी बिजली कनेक्शन प्राप्त कर सकता है।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल अस्थायी राहत है। उपभोक्ताओं को वास्तविक बिजली खपत के अनुसार बिल का भुगतान करना होगा और इस व्यवस्था के आधार पर स्थायी बिजली कनेक्शन का कोई अधिकार नहीं माना जाएगा।

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