पेशेवर रूप से सक्रिय पत्नी की यात्रा न कर पाने की दलील पर भरोसा नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तलाक का केस ट्रांसफर करने से इनकार किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक पत्नी की ट्रांसफर याचिका खारिज की। पत्नी ने अपने पति द्वारा दायर तलाक के केस को अमृतसर से होशियारपुर ट्रांसफर करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा ट्रांसफर करने के लिए कोई ठोस आधार या वास्तविक कठिनाई नहीं दिखाई दी।
जस्टिस निधि गुप्ता ने कहा,
"इसके अलावा, रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी, जिसमें प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा लगाई गई तस्वीरें भी शामिल हैं, उससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता-पत्नी पेशेवर रूप से सक्रिय है। इसलिए पहली नज़र में यह दलील कि वह अमृतसर की यात्रा करने में असमर्थ है, भरोसेमंद नहीं लगती।"
याचिकाकर्ता-पत्नी ने बताया कि वह होशियारपुर में अपने माता-पिता के साथ रह रही है, बेरोजगार है और उसकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है। यह भी कहा गया कि पति गुजारा-भत्ता नहीं दे रहा है।
उसने यह भी बताया कि IPC की धाराओं 406, 498-A और 509 के तहत FIR से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही, और उसके द्वारा शुरू की गई CrPC की धारा 125 के तहत कार्यवाही होशियारपुर में चल रही है। तर्क दिया गया कि कई कार्यवाहियों और असुविधा से बचने के लिए तलाक का केस भी होशियारपुर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने होशियारपुर और अमृतसर के बीच लगभग 150 किलोमीटर की दूरी का भी हवाला दिया और कहा कि उसके साथ जाने के लिए परिवार का कोई पुरुष सदस्य उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उसके माता-पिता बुजुर्ग और बीमार हैं।
याचिका का विरोध करते हुए प्रतिवादी-पति ने खुद पेश होकर तर्क दिया कि ट्रांसफर याचिका उसे परेशान करने के लिए दायर की गई। उसने बताया कि शादी केवल पांच महीने चली और विवाद याचिकाकर्ता के व्यवहार के कारण हुए।
उसने आगे तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एक फैशन मॉडल के तौर पर काम करती है और आर्थिक रूप से स्वतंत्र है। यह भी बताया गया कि उसका भाई दो दशकों से अधिक समय से होशियारपुर में वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रहा है, जिससे केस ट्रांसफर होने पर उसे नुकसान हो सकता है।
प्रतिवादी ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें उसके खिलाफ दर्ज FIR में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई गई। तर्क दिया कि याचिकाकर्ता पेशेवर काम के लिए नियमित रूप से यात्रा करती है, जिससे उसकी यात्रा न कर पाने की दलील गलत साबित होती है।
कोर्ट ने कहा कि हालांकि वैवाहिक ट्रांसफर याचिकाओं में आमतौर पर पत्नी की सुविधा का ध्यान रखा जाता है, लेकिन इस सिद्धांत को बिना सोचे-समझे लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ध्यान दिया कि शादी से कोई बच्चा नहीं हुआ और याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि वह शारीरिक या किसी अन्य वजह से अमृतसर जाने में असमर्थ थी। कोर्ट ने प्रतिवादी की इस बात पर भी ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता पेशेवर रूप से सक्रिय है और काम के सिलसिले में यात्रा करती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि लगभग 150 किलोमीटर की दूरी दो से तीन घंटे में तय की जा सकती है और कोर्ट में रोज़ाना पेश होने की ज़रूरत नहीं होती है।
अनिंदिता दास बनाम श्रीजीत दास (2006) 9 SCC 197 जैसे मामलों का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने दोहराया कि असली मुश्किल न होने पर केस ट्रांसफर करने की मंज़ूरी आसानी से नहीं दी जा सकती।
यह मानते हुए कि केस ट्रांसफर करने के लिए कोई ठोस आधार नहीं था, कोर्ट ने ट्रांसफर की याचिका खारिज की।
Title: XXXX v. XXXXX