'निजी हित को जनहित बताकर दायर याचिका': पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली डिप्टी मेयर पर लगाया ₹25,000 का जुर्माना

Update: 2026-04-09 11:58 GMT

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहाली के डिप्टी मेयर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) को व्यक्तिगत हित से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

चीफ़ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मोहाली में सड़कों के उन्नयन, पुनर्सतहकरण और सौंदर्यीकरण से जुड़े टेंडर प्रक्रियाओं को चुनौती दी गई थी। इससे पहले अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी राजनीतिक संबद्धता बताने का निर्देश दिया था, जिसके बाद हलफनामा दायर किया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिका में दिए गए तथ्यों से संकेत मिलता है कि याचिकाकर्ता स्वयं एक प्रोजेक्ट में बागवानी कार्य से जुड़ा हुआ था, जबकि अन्य कार्य अलग-अलग ठेकेदारों को दिए गए थे। जब इस पर सवाल किया गया तो याचिकाकर्ता के वकील ने इसे तथ्यात्मक त्रुटि बताया, लेकिन अदालत को यह स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं लगा।

अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने कई बार अधिकारियों को प्रतिनिधित्व देने का दावा किया, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।

इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि याचिका में उठाया गया मुद्दा वास्तव में व्यक्तिगत हित से जुड़ा है, जिसे जनहित के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों को वास्तविक जनहित याचिका नहीं माना जा सकता।

इसलिए, हाईकोर्ट ने याचिका को अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर 25,000 रुपये की राशि पीजीआई, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा करने का निर्देश दिया।

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