हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर से जुड़ी खबर पर पत्रकारों के खिलाफ जांच पर लगाई रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के कथित हेलीकॉप्टर मूवमेंट से जुड़ी खबर प्रकाशित करने के मामले में लॉ स्टूडेंट, पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के खिलाफ दर्ज FIR में आगे की जांच पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।
जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की पीठ ने इस मामले में आरोपियों की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए FIR रद्द करने की मांग पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस भारद्वाज ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्टिंग का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है। यह मुद्दा बार-बार अदालतों के समक्ष आता रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग अक्सर आलोचना और व्यंग्य को सहजता से स्वीकार नहीं करते और कई बार प्रतिक्रिया के रूप में आलोचकों को चुप कराने या बदनाम करने की कोशिशें की जाती हैं।
हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल किसी सार्वजनिक पदधारी के आहत होने के आधार पर राज्य की आपराधिक कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता। किसी रिपोर्ट या लेख के खिलाफ कार्रवाई का पैमाना सामान्य समझ-बूझ और प्रत्यक्ष संबंध होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रतिक्रिया को कृत्रिम रूप से भड़काया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी लेखकों पर स्वतः नहीं डाली जा सकती।
हालांकि, अदालत ने मीडिया को एक सावधानी भी दी।
जस्टिस भारद्वाज ने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और विजुअल मीडिया को पत्रकारिता की नैतिकता का पालन करना चाहिए, जिसमें सत्य, सटीकता, स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के प्रति प्रतिबद्धता शामिल है। लेकिन यह पहलू अभी जांच का विषय है।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं में से एक ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मार्च, 2022 से पंजाब सरकार द्वारा चार्टर्ड या किराये पर लिए गए जेट, विमान और हेलीकॉप्टर पर हुए खर्च का विवरण मांगा था। इसमें यात्रा की तारीखें, गंतव्य और यात्रा करने वाले व्यक्तियों के नाम शामिल थे। इस RTI आवेदन को अधिकारियों ने RTI Act की धारा 24 का हवाला देते हुए वीआईपी सुरक्षा से जुड़े कारणों के आधार पर खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मांगी गई जानकारी धारा 24 के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं आती और वैसे भी हेलीकॉप्टर मूवमेंट जैसी जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि “फ्लाइटरडार24” जैसी वेबसाइट पर उड़ानों की जानकारी आम लोगों के लिए सुलभ है।
याचिका में कहा गया कि दिसंबर, 2025 में जब कथित तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री देश से बाहर थे, उस दौरान कई हेलीकॉप्टर उड़ानों को नोटिस किया गया। इसके आधार पर 1 दिसंबर, 2025 से संबंधित उड़ानों पर एक समाचार प्रकाशित किया गया। इसी खबर के बाद संबंधित FIR दर्ज की गई।
FIR में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा की गलत व्याख्या कर “तोड़ी-मरोड़ी और अप्रमाणित जानकारी” प्रकाशित की, जिससे मुख्यमंत्री से जुड़े हेलीकॉप्टर के कथित अनधिकृत या संदिग्ध इस्तेमाल का भ्रामक नैरेटिव बनाया गया। पुलिस का कहना है कि इससे जनता को गुमराह करने, संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास कमजोर करने और सीमावर्ती राज्य पंजाब में सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।
इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 353(1), 353(2) और 61(2) के तहत मामले दर्ज किए गए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट आर.एस. बैंस ने दलील दी कि धारा 353 के आवश्यक तत्व इस मामले में बनते ही नहीं हैं और प्रकाशित खबर पूरी तरह सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी पर आधारित थी।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल एवं सीनियर एडवोकेट चंचल सिंगला ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने भड़काऊ सामग्री अपलोड की, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना थी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि जांच को इस शुरुआती चरण में रोका न जाए और अतिरिक्त सामग्री रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी जाए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा कि किसी अपराध के प्रथम दृष्टया तत्वों का होना स्पष्ट रूप से दिखना आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने अगली सुनवाई तक मामले में आगे की जांच पर रोक लगाई।