सीमा पार माल की कमी के लिए भारतीय रेलवे तभी जिम्मेदार जब नुकसान उसके नेटवर्क पर हुआ हो: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 34 वर्ष पुराने एक मामले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए कहा कि विदेश से भारत आने वाले रेल माल में कमी या नुकसान के लिए भारतीय रेलवे को तभी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जब यह साबित हो कि नुकसान भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर हुआ था।
जस्टिस पंकज जैन ने कहा,
"जब किसी स्थान से जो भारत के बाहर है, रेल के माध्यम से सामान भारत लाया जाता है, तब रेलवे प्रशासन को केवल उसी स्थिति में जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जब माल का मालिक यह साबित करे कि सामान का नुकसान, क्षति या कमी भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर हुई।"
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय सीमा में वैगन पहुंचने के बाद रेलवे का दायित्व था कि वह यह जांच करे कि वैगन की मूल सील सुरक्षित है या नहीं।
हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनी के वकील ने रेलवे दावा अधिकरण के उस निष्कर्ष का विरोध नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि वैगन अपनी मूल सीलों के साथ भारतीय रेलवे को प्राप्त हुआ था।
मामला मई 1989 में लाहौर से भेजी गई 106 बोरियों वाले तांबे के कबाड़ के एक माल से जुड़ा था। अमृतसर पहुंचने पर नौ बोरियां गायब मिलीं, कई बोरियों से छेड़छाड़ पाई गई और 1104 किलोग्राम माल की कमी दर्ज की गई।
बीमा कंपनी ने माल प्राप्तकर्ता को क्षतिपूर्ति का भुगतान करने के बाद रेलवे से राशि की वसूली का दावा किया। रेलवे दावा अधिकरण ने यह दावा खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई।
हाईकोर्ट में बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि जब तक रेलवे यह साबित न कर दे कि उसने परिवहन के दौरान उचित सावधानी बरती, तब तक उसे नुकसान के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए।
लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विवाद भारतीय रेलवे अधिनियम, 1890 के तहत तय होगा, क्योंकि यह लेनदेन नए कानून के लागू होने से पहले का था।
अदालत ने भारतीय रेलवे अधिनियम, 1890 की धारा 76(ई) का हवाला देते हुए कहा कि सीमा पार से भारत आने वाले माल के मामलों में यह साबित करने का दायित्व दावेदार पर होता है कि नुकसान भारतीय रेलवे के अधिकार क्षेत्र में हुआ।
हाईकोर्ट ने पाया कि वैगन भारतीय क्षेत्र में मूल सीलों के साथ पहुंचा था और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि माल की कमी भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर हुई।
इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि रेलवे दावा अधिकरण के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है और बीमा कंपनी कानून के तहत आवश्यक प्रमाण देने में विफल रही। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज की।